प्रायस करते रहे
एक आदमी कही से गुजर रहा था |
तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियो को देखा | बह आगे निकलने
ही बाला था कि हाथियो के पैरों को देखकर अचानक ही रुक गया |उसने
देखा कि हाथियो के अगले पैर मे एक रस्सी बंधी हुई थी | उसे
इस बात पर बड़ी हेरानी हुई कि हाथी जैसे बिशालकाय जीब लोहे कि भारी जंजीरों के बजाय
बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हे ? यह स्पस्ट दिखाई देता
था कि बे जब भी चाहते, इस रस्सी को तोड़कर आजाद हो सकते थे और
कही भी जा सकते थे | लेकिन कोई बजह थी कि बे ऐसा कर ही नहीं
रहे थे | उसने पास खड़े महाबत से पूछा कि भला ये हाथी इतनी शांति से क्यो खड़े हे और
भागने की कोशिश क्यो नही कर रहे | महाबत बोला – इन हाथियो को
इस रस्सी से तब से बांधा जाता हे, जब ये छोटे - छोटे थे ? तब ये कोशिश करने के बाबजूद
इसे तोड़ नहीं पाते थे | बार –बार कोशिश करने पर भी बिफल रहने पर इन्हे यह यकीन हो गया
कि ये इन रस्सियों को तोड़ ही नहीं सकते | अब इतना समय बीतने
के बाद भी ये इन रस्सियों को तोड़ने की कोशिश ही नहीं करते क्यो कि ये उसी बात को
सच मान बैठे हे | हाथियो के इस ब्यबाहर से उस ब्यक्ति को एक
उपयोगी सीख मिल गई थी |
मंत्र : अपनी
बिफलताओ को शाश्बत मानकर प्रायस करना न छोड़ दे |
special thanks to hello- pappu <hellopappu216@gmail.com>
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