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10 Oct 2015

सफलता की कोई उम्र नहीं होती !

इस संसार में बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपने कार्योँ से अपनी उम्र को पीछे छोड़ दिया। यह बात सच है कि हमारे शरीर के कार्य करने की एक सीमा है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर के कार्य करने की क्षमता घटती जाती है, लेकिन जिन लोगों के हौसले बुलंद होते हैं, जो जीवन में कुछ कर गुजरने की चाह रखते हैं, जिनमें उत्साह – उमँग होता है, जिनकी इच्छाशक्ति व संकल्पशक्ति मजबूत होती है, ऐसे व्यक्तियों के सामने कोई बाधा बड़ी नहीं होती। ऐसे व्यक्ति आत्मविश्वास से भरे हुयें होते है, जो असंभव को भी संभव बना देते है।
"हम इसलिए खेलना नहीं छोड़ देते
क्योंकि हम बूढ़े हो जाते हैं,
हम इसलिए बूढ़े हो जाते हैं
क्योंकि हम खेलना छोड़ देते हैं!"
युवा किसी आयु अवस्था का नाम नहीं, बल्क़ि शक्ति का नाम है। जिसने अपने मन और आत्मा की शक्ति को जगा लिया, वह ७० वर्ष की आयु में भी युवा है।
बहुत से लोग उम्र बढ़ने के साथ – साथ सोचने लगते हैं कि अब तो हमारी उम्र हो गयी है, “अब हमसे ये सब नहीं हो सकता”। उनकी यही सोच उन्हें निर्बल बना देती है और कुछ कार्य नहीं करने देती। व्यक्ति जितना अपने शरीर से कार्य करता है, उससे कई गुना कार्य वह अपने मन से करता है। यदि मन की शक्तियाँ ही उसकी कमजोर पड़ गई हैं, तो फिर जरूरत है उन्हें जगाने की।
शक्तियों के जागरण से संबंधित एक ऐतिहासिक कथा याद आती है।
एक राजा के पास कई हाथी थे, लेकिन एक हाथी बहुत शक्तिशाली था, बहुत आज्ञाकारी, समझदार व युद्ध-कौशल में निपुण था। बहुत से युद्धों में वह भेजा गया था और वह राजा को विजय दिलाकर वापस लौटा था, इसलिए वह महाराज का सबसे प्रिय हाथी था। समय गुजरता गया और एक समय ऐसा भी आया, जब वह वृद्ध दिखने लगा। अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर पाता था। इसलिए अब राजा उसे युद्ध क्षेत्र में भी नहीं भेजते थे। एक दिन वह सरोवर में जल पीने के लिए गया, लेकिन वहीं कीचड़ में उसका पैर धँस गया और फिर धँसता ही चला गया। उस हाथी ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह उस कीचड़ से स्वयं को नहीं निकाल पाया। उसकी चिंघाड़ने की आवाज से लोगों को यह पता चल गया कि वह हाथी संकट में है। हाथी के फँसने का समाचार राजा तक भी पहुँचा।
राजा समेत सभी लोग हाथी के आसपास इक्कठा हो गए और विभिन्न प्रकार के शारीरिक प्रयत्न उसे निकालने के लिए करने लगे। जब बहुत देर तक प्रयास करने के उपरांत कोई मार्ग नहीं निकला तो राजा ने अपने सबसे अनुभवी मंत्री को बुलवाया। मंत्री ने आकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और फिर राजा को सुझाव दिया कि सरोवर के चारों और युद्ध के नगाड़े बजाए जाएँ। सुनने वालोँ को विचित्र लगा कि भला नगाड़े बजाने से वह फँसा हुआ हाथी बाहर कैसे निकलेगा, जो अनेक व्यक्तियों के शारीरिक प्रयत्न से बाहर निकल नहीं पाया।
आश्चर्यजनक रूप से जैसे ही युद्ध के नगाड़े बजने प्रारंभ हुए, वैसे ही उस मृतप्राय हाथी के हाव-भाव में परिवर्तन आने लगा। पहले तो वह धीरे-धीरे करके खड़ा हुआ और फिर सबको हतप्रभ करते हुए स्वयं ही कीचड़ से बाहर निकल आया। अब मंत्री ने सबको स्पष्ट किया कि हाथी की शारीरिक क्षमता में कमी नहीं थी, आवश्यकता मात्र उसके अंदर उत्साह के संचार करने की थी। हाथी की इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि यदि हमारे मन में एक बार उत्साह – उमंग जाग जाए तो फिर हमें कार्य करने की ऊर्जा स्वतः ही मिलने लगती है और कार्य के प्रति उत्साह का मनुष्य की उम्र से कोई संबंध नहीं रह जाता।
जीवन में उत्साह बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि मनुष्य सकारात्मक चिंतन बनाए रखे और निराशा को हावी न होने दे। कभी – कभी निरंतर मिलने वाली असफलताओं से व्यक्ति यह मान लेता है कि अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर सकता, लेकिन यह पूर्ण सच नहीं है।
  • हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी आजादी की लड़ाई 48 साल की उम्र में शुरू की थी और हमें आज़ादी दिलाई।
  • जापान के 105 वर्षीय धावक हिडकीची मियाज़ाकि ने 42.22 सेकण्ड्स में 100 मीटर डैश कम्पलीट कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।
  • मशहूर अभिनेता बोमन ईरानी ने 44 साल की उम्र में एक्टिंग करना शुरू की।
  • ग्रामीण बैंक के फाउंडर और नोबल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद युनुस ने 43 साल की उम्र में ग्रामीण बैंक की शुरुआत की।
  • अमिताभ बच्चन आज 70 साल से ऊपर होने के बावजूद सबसे सक्रीय बॉलीवुड स्टार्स में से एक हैं।
ऐसे तमाम उदहारण हैं जहाँ लोगों ने साबित किया है कि अगर कुछ कर गुजरने का हौंसला हो तो क्या उम्र और क्या चुनौतियाँ कुछ मायने नहीं रखता ।
मित्रों, प्रसिद्ध विचारक जॉन ओ डनह्यू का कहना है –
आप उतने युवा है, जितना आप महसूस करते हैं। अगर आप अंदर के उत्साह को महसूस करना शुरू करेंगे, तो एक ऐसी जवानी महसूस  करेंगे, जिसे कोई भी आपसे छीन नहीं सकता”।
मन में उत्साह हो तो उम्र कभी भी कार्य के मार्ग पर बाधा नहीं बनती। बाधा बनती है तो केवल हमारी नकारात्मक सोच। यदि कार्य करना है तो किसी भी उम्र में कार्य किया जा सकता है, कार्य करने के तरीके बदले जा सकते हैं और पहले की तुलना में अधिक अच्छे ढंग से व कुशलतापूर्वक कार्य किया जा सकता है।
उम्र के असर को बहुत हद्द तक अपने प्रयासों, सकारात्मक सोच और उत्साह से कम किया जा सकता है, अतः ये कहने से पहले कि हमारी उम्र हो गयी है , हम ये नहीं कर सकते , वो नहीं कर सकते उन तमाम लगों के बारे में सोचिये जिनके लिए age एक number से अधिक कुछ नहीं है। अगर वो कर सकते हैं तो कोई भी कर सकता है, तो चलिए फिर से सपने देखना शुरू करिए, फिर से उनका पीछा कीजिये और एक बार फिर अपने सपनो को साकार कर दीजिये।
धन्यवाद!
ViratVirat Chaudhary
Palanpur, Gujrat
विराट एक  Professional Blogger हैं और एक IT Education Institute भी run करते हैं.
We are grateful to Virat for sharing this inspirational article with examples of Old Age Success stories in Hindi. We wish him all the very best in all his endeavours.
नोट: दोस्तों, इस लेख में सफलता के लिए अधिक उम्र बाधक नहीं होती; इस बारे में बताया गया है, पर यही बात कम उम्र में सफलता के लिए भी लागु होती है. कम उम्र में भी बहुत से लोगों ने बड़ी-बड़ी सफलताएं हासिल की हैं, फेसबुक फाउंडर मार्क जुकरबर्ग इसका एक बड़ा उदाहरण हैं. उन्होंने मात्र 20 साल की उम्र में Facebook found की थी.
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Thanks.

12 Mar 2015

प्रायस करते रहे

                                                                       

                                                 प्रायस करते रहे
एक आदमी कही से गुजर रहा था | तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियो को देखा | बह आगे निकलने ही बाला था कि हाथियो के पैरों को देखकर अचानक ही रुक गया |उसने देखा कि हाथियो के अगले पैर मे एक रस्सी बंधी हुई थी | उसे इस बात पर बड़ी हेरानी हुई कि हाथी जैसे बिशालकाय जीब लोहे कि भारी जंजीरों के बजाय बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हे ? यह स्पस्ट दिखाई देता था कि बे जब भी चाहते, इस रस्सी को तोड़कर आजाद हो सकते थे और कही भी जा सकते थे | लेकिन कोई बजह थी कि बे ऐसा कर ही नहीं रहे थे | उसने पास खड़े महाबत से पूछा  कि भला ये हाथी इतनी शांति से क्यो खड़े हे और भागने की कोशिश क्यो नही कर रहे | महाबत बोला – इन हाथियो को इस रस्सी से तब से बांधा जाता हे, जब ये छोटे - छोटे थे  ? तब ये कोशिश करने के बाबजूद इसे तोड़ नहीं पाते थे | बार –बार कोशिश  करने पर भी बिफल रहने पर इन्हे यह यकीन हो गया कि ये इन रस्सियों को तोड़ ही नहीं सकते | अब इतना समय बीतने के बाद भी ये इन रस्सियों को तोड़ने की कोशिश ही नहीं करते क्यो कि ये उसी बात को सच मान बैठे हे | हाथियो के इस ब्यबाहर से उस ब्यक्ति को एक उपयोगी सीख मिल गई थी |
मंत्र : अपनी बिफलताओ को शाश्बत मानकर प्रायस करना न छोड़ दे | 




special thanks to hello- pappu <hellopappu216@gmail.com>

25 Feb 2014

प्रयास की दिशा – Knowing Where to Make an Effort


यह विश्व की सबसे अधिक पढ़ी गई प्रेरक लघुकथा है. बचपन में मैंने इसे कहीं पढ़ा और यह मुझे इसी रूप में पढ़ने को मिलती रही है. प्रसिद्ध लघुकथाओं के स्वरूपों में समय के साथ ही परिवर्तन आ जाते हैं और यह स्वाभाविक भी है, लेकिन यह लघुकथा न्यूनतम परिवर्तनों के साथ पीढ़ी-दर-पीढ़ी पढ़ी जाती रही है. बहुत संभव है कि आप इसे पहले ही कहीं पढ़ चुके हों लेकिन इस वेबसाइट में इसका समावेश आवश्यक लग रहा था इसलिए इसे प्रस्तुत किया जा रहा हैः
कभी ऐसा हुआ कि एक बड़े जहाज का इंजन खराब हो गया. जहाज के मालिक ने बहुत सारे विशेषज्ञों को बुलाकर उसकी जांच कराई लेकिन किसी को भी समझ में नहीं आया कि इंजन में क्या गड़बड़ थी.
जब किसी को भी जहाज के इंजन की खराबी का कारण पता न चला तो एक बूढ़े मैकेनिक को बुलाया गया जो बहुत छोटी उम्र से ही जहाज के इंजनों को ठीक करने का काम कर रहा था.
बूढ़ा मैकैनिक अपने औजारों का बक्सा लेकर आया और आते ही काम में जुट गया. उसने इंजन का बारीकी से मुआयना किया.
जहाज का मालिक भी वहीं था और उसे काम करते देख रहा था. बूढ़े मैकेनिक ने इंजन को जांचने के बाद अपने बक्से से एक छोटी सी हथौड़ी निकाली और इंजन के एक खास हिस्से पर हथौड़ी से धीरे से चोट की. चोट पड़ते ही इंजन गड़गड़ाते हुए चल पड़ा. बूढ़े ने हथौड़ी बक्से में वापस रख दी. उसका काम पूरा हो गया था.
एक हफ्ते बाद जहाज के मालिक को बूढ़े मैकैनिक का बिल मिला जिसमें उसने इंजन की मरम्मत के लिए दस हजार रूपए चार्ज किए थे.
बिल देखते ही मालिक चकरा गया. उसे लगा कि बूढ़े मैकेनिक ने ऐसा कुछ नहीं किया था जिसके लिए उसे इतनी बड़ी रकम दी जाए.
उसने बिल के साथ एक नोट लिखकर वापस भेज दिया कि मरम्मत के काम का आइटम-वाइज़ बिल भेज दीजिए.
बूढ़े मैकेनिक ने बिल रिवाइज़ करके भेज दिया. बिल में लिखा थाः
1. हथौड़ी से चोट करने की फीस – रु.5.00/-
2. चोट करने की जगह खोजने की फीस – रु.9,995/-
    कुल- – रु.10,000/-
 
अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रयास करना बहुत ज़रूरी है, लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण इस बात का ज्ञान होना है कि प्रयास किस दिशा में किए जाएं.
मैंने इस कहानी के स्रोत की खोज करने का प्रयास किया तो मुझे पता चला कि यह कहानी जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी में काम करनेवाले एक मैकेनिक चार्ल्स स्टीनमेट्ज़ से संबंधित एक वास्तविक घटना पर आधारित है. उसे एक बड़े इलेक्ट्रिक जेनेरेटर को रिपेयर करने के लिए बुलाया गया था. जेनरेटर का निरीक्षण करने के बाद उसने उसके एक पार्ट पर चॉक से निशान लगा दिया और स्टाफ को समझाया कि उस पार्ट पर क्या काम करने की ज़रूरत है. कंपनी ने उसके बड़े बिल को जब डीटेल के साथ प्रस्तुत करने के लिए लौटा दिया तब उसने चॉक का निशान लगाने के लिए एक डॉलर चार्ज किया और बाकी की रकम उस पार्ट को खोजने के लिए चार्ज की.
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6 Feb 2014

मार्क ज़ुकुर्बर्ग के बारे में कुछ रोचक बातें


आप को सोशलनेटवर्किंग साइट फेसबुक के बारे में तो खूब जानकारी होगी पर क्‍या आपको इसे बनाने वाले टैलेंटेड इंसान के बारे में भी पता है? फेसबुक साइट फरवरी, 2004 में यंग टेलेंटेड मार्क जुकरबर्ग के हाथों द्रारा विकसित की गई थी। 14 मई को इस प्रतिभावान इंटरनेट उघमी का जन्‍मदिन है। तो चलिये जानते हैं मार्क जुकरबर्ग के बारे में कुछ ऐसे तथ्‍यों के बारे में जो शायद ही किसी को पता हो।


1.कॉलेज ड्राप आउट- जब फेसबुक अस्‍तित्‍व में नहीं आया था, उससे पहले ही इन्‍हें हावर्ड यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया था। तब किसे पता था कि यह जल्‍द ही एक अरबपति बन जाएंगे। इनके अलावा ऐसे कई ड्राप आडट थे, जो कि अरबपति बने। उनमें से बिल गेट और स्‍टीव जॉब भी शामिल थे।
2.विश्‍व का 14वां अमीर इंसान- मार्क जुकरबर्ग सबसे दुनिया के सबसे कम उम्र में बनने वाले अरबपति हैं। फेसबुक की आपार सफलता ने इन्‍हें यह पहचान दिलाई है।
3.कॉलेज में शुरु किया फेसबुक- यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही मार्क ने एक वेबसाइट शुरु की जिसका नाम "फेसमैश" था। इस साइट ने कॉलेज में तो कोई खास कमाल नहीं दिखाया लेकिन जब मार्क ने इसी साइट को Facebook.com
के नाम से पबलिक में लांच किया तो इसने धमाल मचा दिया।
4.कलर ब्‍लाइंड- यह 28 वर्षीय फेसबुक का सीइओ कलर ब्‍लाइंड की बीमारी से पीडित है। तभी तो इन्‍होंने अपनी साइट के लिये गहरे नीले रंग का प्रयोग किया है, जिससे इन्‍हें देखने में किसी तरह की कोई परेशानी न हो।


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30 Jan 2014

३ शिक्षाप्रद कहानिया


ये कुछ ऐसी stories है जो मैंने दूसरे motivational blogs पर पढ़ी..
और आपके लिए translate कर रहा हूँ.. हमारी यही कोशिश रहती है की हिंदी सोच पर best stories ही प्रकाशित करे और ये stories आपको यक़ीनन पढ़ना चाहिए ऐसा मुझे लगता है. क्या है, की इंसान अपने personal experience के through सबसे ज्यादा सीखता है..
और उसके बाद stories के जरिये..
इसीलिए तो हमे बचपन में कहानियाँ सुनाई जाती थी.. खैर.. वो बातें
फिर कभी..
पेश है आज की post..

story #1
बदलाव

एक लड़का हर sunday सुबह सुबह तालाब के किनारे jogging करने जाता था. और हमेशा एक बूढी महिला को देखता था. जो किनारे पर बनी बेंच पर बैठकर तालाब के छोटे छोटे कछुओ को उठाकर उनकी पीठ साफ़ किया करती थी.. 
एक ऐसे ही sunday को जब वो लड़का वहाँ से  गुज़रा तो उसी महिला को देखा.. इस बार वो उनके पास गया और पूछा.. “नमस्ते, मैं हमेशा आपको कछुओ की पीठ साफ़ करते हुए देखता हूँ.. आप ऐसा क्यों करती है?” महिला ने पहले तो उसे देखा, और फिर शांत मुस्कराहट के साथ कहा- ” मैं हर रविवार को यहाँ आती हूँ.. और शान्ति का सुख लेते हुए.. इन छोटे छोटे दोस्तों के कवच साफ़ करती हूँ.. .. दरअसल, इनकी पीठ पर जो काई, और दूसरी चीज़े चिपकी रह जाती है.. उनसे इनके कवच की गर्मी पैदा करने की क्षमता कम पड़ जाती है. और तैरने में भी इन्हें तकलीफ देती है.. कुछ सालो में इनके कवच कमजोर भी पड़ जाते है.. इसलिए मैं यहाँ बैठकर इन्हें साफ़ करती हूँ..” लड़का थोडा हैरान था.. वो बोलाये है तो बहुत ही अच्छी बात है.. और मैं समझ सकता हूँ की ये एक अच्छा काम है पर.. क्या आपको नहीं लगता की दुनिया भर में जाने ऐसे कितने कछुए होगे. और शायद उनकी मदद करने के लिए कोई नहीं है.. आपको नहीं लगता की आप अपने वक़्त का बेहतर इस्तेमाल कर सकती हैं..” महिला ने कहा, ” मुझे इसे करने में ख़ुशी मिलती है.. दुनिया में बदलाव पैदा करने का ये मेरा तरीका है.” लड़का और भी हैरान हुआ.. बोलाइससे भला दुनिया में कैसा बदलाव आएगा?” महिला ने अपने हाथ में रखे कछुए की तरफ इशारा करते हुए कहा.. ” भले ही पूरी दुनिया में इससे कोई बदलाव आये.. पर इस छोटे से कछुए से पूछो, मेरे इस कार्य से इसके जीवन में कितना बड़ा बदलाव आएगासबक: यदि आप सहायता करने के काबिल है. तो करें. हो सकता है आपके द्वारा की हुई छोटी सी मदद पूरी दुनिया में बदलाव की लहर ला पाए. पर वो एक व्यक्ति, जिसकी आपने हेल्प की है, उसकी दुनिया आप खुशहाल कर सकते है.


story #2
ग्लास का भार एक बार एक साइकोलॉजी की प्रोफेसर class में आई. और एक glass उठा लिया.. सबने सोचा की अब वो वहीँ पुरानाग्लास आधा ख़ाली है या आधा भरा वाला lesson पढ़ाएगी. पर उसके बदले उन्होंने छात्रों से पूछा की उनके हाथ में जो glass है उसका वजन कितना है? सभी छात्रों ने अपने अपने अनुसार उत्तर दिए.. किसी ने 50 gram कहा, तो किसी ने 100 ग्राम.. पर महिला प्रोफेसर ने जवाब दिया: ” मेरे ख्याल से इस glass का exact weight matter नहीं करता.. बल्कि ये matter करता है की मैं इसे कितनी देर तक hold करके रखती हूँ. अगर मैं इसे केवल 1-2 minute के लिए उठा के रखती हूँ तो ये मुझे सामान्य सा लगेगा.. पर यदि मैं इसे एक घंटा उठा के रखती हूँ तो मेरा हाथ दुखने लगेगा.. पर यदि मैं इसे पूरा दिन उठा के रखूं.. तो यक़ीनन मेरा हाथ सुन्न पड़ जायेगा.. थोड़ी देर के लिए paralyse हो जायेगा.. मतलब की इसका थोडा सा भार भी, यदि मैं ज्यादा देर तक उठा की रखूं. तो मुझे तकलीफ हो सकती है..” सभी इस उत्तर से सहमत थे. वो आगे बोली, इसी तरह अगर, एक छोटी सी problem की चिंता मैं करती रहूँ.. तो पहले वो कोई ख़ास भार नहीं देगी मन पर.. पर यदि मैं उसी के बारे में सोचती रहूँ.. उसी से परेशान रहूँ.. उसी पर stress करती रहूँ.. तो वो छोटी से परेशानी भी मुझे बहुत बड़ी तकलीफ दे सकती है.. मैं डिप्रेशन का शिकार हो सकती हूँ.. मैं दूसरा कुछ भी कार्य करने में असमर्थ हो जाउंगी.. यही तो हमारी actual परेशानी है..” सबक : आप अपने परेशानियो को मन से जाने दे, ये बहुत जरुरी है. आपकी परेशानियां आपके मन में रहे या रहे ये आप decide कर सकते है. किसी भी problem का इतना stress लें.. की आपके स्वास्थ को दिक्कत हो..

story #3
ग़लत विश्वास एक experiment के दौरान, एक marine biologist ने एक बड़े से टैंक में एक shark मछली को रखा.. और उसके साथ ही कुछ छोटी मछलियों को भी उसी टैंक में डाल दिया.. जैसा की हम expect कर सकते है की shark ने तुरंत ही उन सारी मछलियों का सफाया कर दिया.. इसके बाद marine biologist ने tank में एक बहुत ही मजबूत fiberglass लगा दिया.. और टैंक के दो हिस्से कर दिए.. एक हिस्से में shark थी. और दुसरे हिस्से में उसने फिर से छोटी मछलियों को डाला.. जैसे ही shark की नज़र उन पर पड़ी.. वो उन्हें खाने के लिए लपकी. पर इस बार बीच में fiberglass होने की वजह से shark उससे जा टकराई.. एक बार टकराने के बाद भी shark ने हार नहीं मानी.. वो हर कुछ minute के अंतराल के बाद उस दिशा में बढती.. जहा मछलिया थी.. और टकरा के फिर पलट आती.. इस दौरान छोटी मछलिया आसानी से और आज़ादी से तैर रही थी.. और कुछ एक डेढ़ घंटे के बाद shark ने हार मान ली. ये experiment पुरे हफ़्ते भर में कई बार किया गया.. धीरे धीरे shark के हमले कम होते गए.. और वो ज्यादा जोर भी नहीं लगाती थी. बार बार कोशिश करते रहने से, पर फिर भी मछलियों तक पहुँचपाने से शार्क ने थक कर हार मान ली. और प्रयास करना छोड़ दिया. कुछ दिनों के बाद marine biologist ने बिच में मौजूद fiberglass को हटा दिया. पर इसके बाद भी shark ने कभी हमला नहीं किया. shark को पिछले कुछ हफ्तों में विश्वास हो गया था की वो उन मछलियों तक नहीं पहुँच सकती. और दूसरी छोटी मछलिया बिना किसी नुकसान के तैरने लगी.. shark उन तक पहुँचने के कोशिश भी नहीं करती थी

सबक : हममे से कई लोग, हार और निराशा को experience करने के बाद, give up कर देते है. वो ये सोचते है की क्योंकि वो पहले कई बार हार चुके है, और सफल नहीं हुए है. इसलिए वे आगे भी ऐसे ही रहेगे.. ऐसा मत कीजिये.

ये तीनो छोटी छोटी hindi short stories ने मुझे motivation और सिख प्रदान की थी.. उम्मीद है आपको भी ये रास आई होगी. यदि आपको इंटरेस्ट हो तो आप और hindi stories पढ़ सकते है. आपको ये कहानियाँ कैसे लगी हमे जरुर बताये comments के माध्यम से

यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: bhaveshabvp@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!