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13 May 2014

तरबूज खाने का स्‍वास्‍थ्‍य लाभ


गर्मी का आकर्षक और आवश्‍यक फल तरबूज शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है। इसमें एंटी ऑक्‍सीडेंट भी होता है और यही नहीं रिसर्च के अनुसार तरबूज पेट के कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह से बचाता है। तरबूज में 92% पानी और 6% शक्‍कर होती है, यह विटामिन ए, सी और बी6 का सबसे बडा़ स्‍त्रोत है। इसमें बीटा कैरोटीन होता है जो कि हृदय रोग के रिस्‍क को कम कर के सेल रिपेयर करता है।
तरबूज खाने का स्‍वास्‍थ्‍य लाभ
तरबूज के फायदे-
1. तरबूज में लाइकोपिन पाया जाता है, लाइकोपिन हमारी त्वचा को जवान बनाए रखता है। ये हमारे शरीर में कैंसर को होने से भी रोकता है।

2. तरबूज में विटामिन ए और सी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। विटामिन सी हमारे शरीर के प्रतिरक्षा तन्त्र को मजबूत बनाता है और विटामिन ए हमारे आँखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होता है।

3. तरबूज और उसके बीजों की गिरी शरीर को पुष्ट बनाती है। तरबूज खाने के बाद उसके बीजों को धो सुखा कर रख लें जिन्हें बाद में भी खाया जा सकता है।

4. अपचन, भूख बढ़ाने तथा खून की कमी होने पर भी तरबूज बहुत लाभदायक सिद्ध होता है । एक बड़े तरबूज में थोड़ा-सा छेद करके उसमें एक ग्राम चीनी भर दें। फिर दिन तक उस तरबूज को धूप में तथा रात में चंद्रमा की रोशनी में रखें। उसके बाद अंदर से पानी निचोड़ लें और छानकर काँच की साफ बोतल में भर लें। यह तरल पदार्थ चौथाई कप की मात्रा में दिन में दो से तीन मर्तबा पीने से उपरोक्त तकलीफों में अत्यंत लाभकारी होता है।

5. तरबूज की फाँकों पर काली मिर्च पाउडर, सेंधा व काला नमक बुरककर खाने से खट्टी डकारें आना बंद होती हैं।

6. तरबूज का गूदा लें और इसे "ब्लैकहेड्स" के प्रभावित जगह पर आहिस्ता-आहिस्ता रगड़ें। एक ही मिनट उपरांत चेहरे को गुनगुने पानी से साफ कर लें।

7. तरबूज खाते समय इस बात का ध्यान रखें कि इसे खाने के बाद 1 घंटे तक पानी न पियें अन्यथा लाभ के स्‍थान पर शरीर को हानि पहुंच सकती है। तरबूज ताजा काट कर खायें। बहुत पहले का कटा तरबूज भी नुकसान पहुंचाता है।

15 Apr 2014

कैसे बचे गर्मी से.?




आया  मौसम  गर्मी ,लू का…… 
दोस्तों ,मई का महीना आ गया है और सूरज अपनी प्रखर किरणों की तीव्रता से संसार के जलियांश (स्नेह )को सुखा कर वायु में रूखापन और ताप बढ़ा कर मनुष्यों के शरीर के ताप की भी वृद्धि कर रहा है!
गर्मी में होने वाले आम रोग – गर्मी में लापरवाही के कारण सरीर में निर्जलीकरण (dehydration),लू लगना, चक्कर आना ,घबराहट होना ,नकसीर आना, उलटी-दस्त, sun-burn,घमोरिया जैसी कई diseases हो जाती हैं.
इन बीमारियों के होने में प्रमुख कारण-
  • गर्मी के मोसम में खुले शरीर ,नंगे सर ,नंगे पाँव धुप में चलना ,
  • तेज गर्मी में घर  से खाली पेट या प्यासा बाहर जाना,
  • कूलर या AC से निकल कर तुरंत धुप में जाना ,
  • बाहर धुप से आकर तुरंत ठंडा पानी पीना ,सीधे कूलर या AC में बेठना
  •  तेज मिर्च-मसाले,बहुत गर्म खाना ,चाय ,शराब इत्यादि का सेवन ज्यादा करना ,
  • सूती और ढीले कपड़ो की जगह सिंथेटिक और कसे हुए कपडे पहनना इत्यादि कारण गर्मी से होने वाले रोगों को पैदा कर सकते है



हम कुछ छोटी-छोटी किन्तु महत्त्वपूर्ण बातो का ध्यान रख कर ,इन सबसे बचे रह कर ,गर्मी का आनंद ले सकते हैं!
उपचार से बचाव  बेहतर होता है,है ना?
तो चलिए हम कुछ वचाव के तरीके जानते हैं -
  • गर्मी में सूरज अपनी प्रखर किरणों से जगत के स्नेह को पीता रहता है,इसलिए गर्मी में मधुर(मीठा) ,शीतल(ठंडा) ,द्रव (liquid)तथा इस्निग्धा  खान-पान हितकर होता है
  • दिन में कम से कम 5-7 लीटर पानी जरुर पिए.
  • गर्मी में जब भी घर  से निकले ,कुछ खा कर और पानी पी कर ही निकले ,खाली पेट नहीं.
  • गर्मी में ज्यादा भारी (garish),बासा भोजन नहीं करे,क्योंकि गर्मी में सरीर की जठराग्नि मंद रहती है ,इसलिए वह भारी खाना पूरी तरह पचा नहीं पाती और जरुरत से ज्यादा खाने या भारी खाना खाने से उलटी-दस्त की शिकायत हो सकती है
  • गर्मी में सूती और हलके रंग के कपडे पहनने चाहिये
  • चेहरा और सर रुमाल या साफी से ढक कर निकलना चाहिये
  • प्याज का सेवन तथा जेब में प्याज रखना चाहिये
  • बाजारू ठंडी चीजे नहीं बल्कि घर की बनी ठंडी चीजो का सेवन करना चाहिये
  • ठंडा मतलब आम(केरी) का पना,  खस,चन्दन गुलाब फालसा संतरा  का सरबत ,ठंडाई सत्तू, दही की लस्सी,मट्ठा,गुलकंद का सेवन करना चाहिये
  • इनके अलावा लोकी ,ककड़ी ,खीरा, तोरे,पालक,पुदीना ,नीबू ,तरबूज आदि का सेवन अधिक करना चाहिये
  • अगर आप योग के जानकार हैं ,तो सीत्कारी ,शीतली तथा चन्द्र भेदन प्राणायाम  एवं शवासन का अभ्यास कीजिये ये शारीर में शीतलता का संचार करते हैं


तो दोस्तों इन कुछ छोटी छोटी बातो का ध्यान रख कर गर्मी की गर्मी से हम स्वयं को बचा सकते हैं!
डॉ. नीरज यादव ,एम.डी. (आयुर्वेद)                                                                                                 आयुर्वेद चिकित्साधिकारी, बारां
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त्वचा की सम्पूर्ण देखभाल



सुंदर त्वचा आपकी पहचान है। त्वचा हमेशा स्वस्थ और सुंदर बनी रहे इसके लिए जरूरी है सही देखभाल स्किन केयर रुटीन में क्लींजिंग, टोनिंग और मॉयस्चरराइजिंग के अलावा अन्य क्या चीजें शामिल करें, इसके लिए यहां दी जा रही हैं ए टू जेड स्किन केयर गाइड 
सुंदर दिखने के लिए सबसे पहली जरूरत है चमकदार व साफ त्वचा। चेहरे को सुंदर बनाने के लिए मेकअप , क्रीम और फेशियल ही काफी नहीं है। इसके लिए स्किन ए टु जेड देखभाल का फंडा जानना जरूरी है।

A एंटीऑक्सीडेंट
यह त्वचा की कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाता है। साथ ही सूर्य की नुकसानदेह अल्ट्रावायलेट किरणों से त्वचा की सुरक्षा करता है। एंटीऑक्सीडेंट से चेहरे पर चमक आती है। एंटीऑक्सीडेंट फल-हरी पत्तेदार सब्जियों में पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।

B बीटा कैरोटिन
शोधों से साबित हो चुका है कि बीटा कैरोटिन त्वचा के लिए वरदान है। यह त्वचा को सूर्य की किरणों से होने वाले नुकसान से सुरक्षित रखता है। बीटा कैरोटिन प्री मैच्योर एजिंग से बचाता है। गाजर में यह पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है और मौजूद विटमिन ए त्वचा को स्मूद और सवस्थ बनाए रखने में मदद करता है।

C कोलेजन
इससे त्वचा को मजबूती मिलती है। 80 प्रतिशत त्वचा इस प्रोटीन से बनी होती है। यह त्वचा में कसाव लाता है और मजबूती प्रदान करता है। कोलेजन स्वभाविक रुप से समय के साथ टूट जाते हैं पर कुछ तत्व रेटीनॉल और पेप्टाइड्स के रुप में नए कोलेजन बनाते हैं। शरीर में कोलेजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

D ड्राइनेस
त्वचा के रुखेपन को दूर करने के लिए पानी की कमी ना होने दें। दिन में आठ-दस गिलास पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें। दिन में दो बार बॉडी लोशन क्रीम ले मॉयस्चरराइज करें। इससे त्वचा की नमी बरकरार रहेगी और वह खिली-खिली नजर आएंगी। इसके अलावा चेहरा साफ करने के बाद 1/2 टी स्पून ग्लिसरीन में २-३ बूंद गुलाबजल  मिलाकर चेहरे पर लगाएं। रात को सोने से पहले ऐसा करें।

E एसेंशियल ऑयल
यह त्वचा संबंधी कई समस्याओं को दूर करने में सहायक होते हैं मसलन एग्जीमा, रैशेज, जलन और लाली। ऐसेंशियल ऑयल त्वचा को ठंडक, ताजगी और चमक भी प्रदान करते हैं। त्वचा की किस्म और जरूरत के मुताबिक एसेंशियल ऑयल इस्तेमाल करके आप गजब का निखार पा सकती हैं। मसलन रूखी त्वचा के लिए -सैंडलवुड , जैस्मिन और लैवेंडर, तैलीय व संवेदनशील त्वचा के लिए-टी ट्री, लैवेंडर और रोजमेरी। 
F फेशियल
धूल प्रदूषण और धूप का सामना करते-करते त्वचा कुम्हला जाती है। इसलिए आराम देने के लिए नियमित रुप से फेशियल बहुत जरूरी है। फेशियल का मतलब सिर्फ मसाज से ही नहीं होता है। इसमें त्वचा की डीप क्लींजिंग की जाती है। ताकि बंद छिद्र खुल जाएं और त्वचा खुल कर सांस ले सके। इससे त्वचा को पोषण मिलता है और कुदरती चमक आती है।

G ग्लिसरीन
त्वचा की कुदरती नमी बरकरार रखने के लिए ग्लिसरीन का इस्तेमाल करें। खास तौर पर यह रूखी त्वचा के लिए वरदान है। पैक या उबटन में इसका इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है। त्वचा की स्क्रबिंग के लिए ग्लिसरीन में शक्कर मिलाएं। यह संवेदनशील त्वचा के लिए एक बेहतरीन स्क्रब है। जहां यह मृत कोशिकाएं हटाता है वहीं त्वचा को कांतिमय बनाता है।  

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25 Feb 2014

दही-एक चमत्कारिक औषधि




जिन्हें दूध अच्छा नहीं लगता , उनके लिए दही एक रुचिकर और सेहतमंद माध्यम है.दही में अच्छी किस्म के बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं
.
  • दही के नियमित सेवन से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती हैं तथा कई प्रकार के विटामिन बनने लगते हैं। दही में जो बैक्टीरिया होते हैं, वे लेक्टेज बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं।
  • मोटापा कम करने के लिए दही प्रभावशाली है।
  • दही में हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की अद्भुत क्षमता है। यह हमारे रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रोल नामक घातक पदार्थ को बढ़ने से रोकता है, जिससे वह नसों में जमकर ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित न करे और हार्टबीट सही बनी रहे।
  • दही में कैल्शियम की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो हमारे शरीर में हड्डियों का विकास करती है। दांतों एवं नाखूनों की मजबूती एवं मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में भी सहायक है।
  • पेट में गड़बड़ हो, पतले दस्त हों तो दही के साथ ईसबगोल की भूसी लें। दही के साथ चावल खाएं।
  • बवासीर के रोगियों को चाहिए कि दोपहर में भोजन के बाद एक गिलास छाछ में अजवायन डालकर पीएं।
  • पेट के रोगियों को चाहिए कि ज्वार की रोटी के साथ दही लें। दही का सेवन भुने हुए जीरे व सेंधा नमक के साथ करें।
  • दही में शहद मिलाकर चटाने से छोटे बच्चों के दांत आसानी से निकलते हैं।
  • मुंह के छालों में दही कम करने के लिए दिन में कई बार दही की मलाई लगाएं। इसके अलावा शहद व दही की समान मात्रा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
  • गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है। इसे पीकर बाहर निकलें तो लू लगने का डर भी नहीं रहता है।
  • दुबले व्यक्तियों को चाहिए कि दही में किशमिश, बादाम, छुहारा आदि मिलाकर पीएं। इससे वजन बढ़ता है।
  • दही में नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गर्दन, कोहनी, एड़ी, हाथों पर लगाएं। कुछ देर बाद कुनकुने पानी से धो डालें।
  • अगर गर्दन के पिछले भाग में कालापन जमा हो गया है नहाते समय गर्दन पर खट्टी दही से मालिश करें और धो लें।
  • बालों को सुंदर, स्वस्थ व नीरोग रखने के लिए बालों को धोने के लिए दही या छाछ का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि दही में वे सब तत्व मौजूद रहते हैं, जिनकी बालों को आवश्यकता रहती है। स्नान से पूर्व दही को बालों में डालकर अच्छी तरह मालिश करें ताकि बालों की जड़ों तक दही पहुंच जाए। कुछ समय बाद बालों को धो दें। दही के प्रयोग से खुश्की, रूसी व फियास समाप्त हो जाती है।
  • दही को जीरे व हींग का छौंक लगाकर खाने से जोड़ों के दर्द में लाभ पहुंचता है। यह स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है।
  • गर्मी के दिनों में पसीना काफी निकलता है। पसीने की बदबू दूर करने के लिए दही और बेसन मिलाकर शरीर पर मालिश करें तथा कुछ देर बाद स्नान करें, इससे पसीने की बदबू दूर हो जाती है।
  • नींद न आने से परेशान रहने वाले लोगों को दही व छाछ का सेवन करना चाहिए।
  • दही का सेवन कुछ आयुर्वेदिक औषधियों में सह्पान के साथ कराने का भी विधान है, जिससे दवा का प्रभाव बढ़ जाता है।

सावधानी --
  • दही हमेशा ताजी ही प्रयोग करनी चाहिए।
  • रात्रि में दही नही किया जाना चाहिए।
  • मांसाहार के साथ दही के सेवन को विरुद्ध माना गया है।
  • दही दस्त या अतिसार के रोगियों में मल को बांधनेवाली होती है,पर सामान्य अवस्था में कब्ज कर सकती है।
  • मधुमेह से पीडि़त रोगियों में दही का सेवन संयम से करना चाहिए।
  • जब खांसी,जुखाम,टांसिल्स एवं, सांस की तकलीफ हो तब दही का सेवन न करें तो अच्छा।
  • दही सदैव ताज़ी एवं शुद्ध घर में मिटटी के बर्तन क़ी बनी हो तो अत्यंत गुणकारी होती है।
  • त्वचा रोगों में दही का सेवन सावधानी पूर्वक चिकित्सक के निर्देशन में करना चाहिए।
  • मात्रा से अधिक दही के सेवन से बचना चाहिए।

कमर दर्द भगाने के घरेलु उपाय


कमर दर्द की यह समस्या आजकल आम हो गई है। सिर्फ बड़ी उम्र के लोग ही नहीं बल्कि युवा भी कमर दर्द की शिकायत करते रहते हैं। कमर दर्द की मुख्य वजह बेतरतीब जीवनशैली और शारीरिक श्रम न करना है।



अधिकतर लोगों को कमर के मध्य या निचले भाग में दर्द महसूस होता है। यह दर्द कमर के दोनों और तथा कूल्हों तक भी फ़ैल सकता है। बढ़ती उम्र के साथ कमर दर्द की समस्या बढ़ती जाती है। नतीजा काम करने में परेशानी । कुछ आदतों को बदलकर इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। आज हम आप को बताते हैं कि किन घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप कमर दर्द से निजात पा सकते हैं।

क्‍यों होता है कमर दर्द
  • मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव।
  • अधिक वजन।
  • गलत तरीके से बैठना।
  • हमेशा ऊंची एड़ी के जूते या सेंडिल पहनना।
  • गलत तरीके से अधिक वजन उठाना।
  • शरीर में लम्बे समय से बीमारियों का होना।
  • अधिक नर्म गद्दों पर सोना।


कमर दर्द से बचने के घरेलू उपाय
  1. रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।
  2. नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।
  3. कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।
  4. अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।
  5. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।
  6. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।
  7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।
  8. कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।

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21 Feb 2014

डैंड्रफ के इलाज के लिए 15 घरेलू टिप्सस


बालों में रूसी होना आम बात है। सर्दियों में अक्‍सर यह समस्‍या और बढ़ जाती है। कई महंगे सौंदर्य उत्‍पाद आजमाने क बाद भी इससे निजात नहीं मिलती। और अगर मिलती भी है तो स्‍थायी। यानी चंद दिनों बाद यह डैंड्रफ दोबारा लौट आती है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे घरेलू उपाय जो आपको डैंड्रफ से स्‍थायी राहत दिलाते हैं ।



बालों में डेंड्रफ की समस्‍या आजकल आम हो चली है। डेंड्रफ सिर की त्‍वचा में स्थित मृत कोशिकाओं के कारण पैदा होती है। बालों में डेंड्रफ होने से बाल बेजान हो जाते है, गिरने लगते हैं और सिर में खुजली भी रहती है। बालों में लगातार डेंड्रफ बने रहने से परेशान लोग कई तरह के एंटीडेंड्रफ शैम्पू इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इस तरह के शैम्पू के उपयोग से डेंड्रफ को जड़ से साफ नहीं किया जा सकता है। जब तक इन उत्‍पादों का इस्‍तेमाल किया जाता है, तब तक तो डेंड्रफ दूर रहती है, लेकिन इनका प्रयोग बंद करते ही डेंड्रफ दोबारा हो जाती है। इसलिए डेंड्रफ के ईलाज के लिए घरेलू उपाय ही ज्यादा कारगर साबित होते हैं। आइए जाने डेंड्रफ से निजात पाने के घरेलू टिप्स।

डेंड्रफ मिटाने के लिए कुछ घरेलू टिप्स

  1. चार चम्मच खसखस को दूध में पीस कर बालों की सप्‍ताह में दो बार जड़ों में लगाएं। आधे घंटे बाद सिर धोएं। धोने में आयुर्वेदिक शैम्पू का इस्तेमाल करें।
  2. चार बड़े चम्मच बेसन को एक बड़े गिलास पानी में घोलकर बालों पर लगाए और सिर धो लें। डैंड्रफ खत्म हो जाएगी।
  3. रात को अरहर की दाल छिलके सहित पानी में भिगो दें। सुबह इसे पीसकर सिर में लगा लें। आधे घंटे बाद सिर धोएं। और फिर गीले बालों में ही कंघा करें।
  4.  नारियल के तेल में कपूर मिला कर अच्छी तरह से बालों में तथा सिर पर लगाएं। कुछ ही दिनों में डैंड्रफ की समस्या का समाधान हो जाएगा।
  5. बालों मे तिल के तेल की मालिश करें। मालिश के आधे घंटे बाद तौलिया को गर्म पानी में भिगोकर उसे निचोड़ लें और सिर पर लपेट लें। थोड़ी देर बाद सिर धो लें।
  6. नींबू के रस में नारियल के तेल को मिलाकर बालों में लगाएं। कुछ देर बाद सिर धो लें।
  7. ग्लिसरीन और गुलाब जल का मिश्रण बना कर एक शीशी में रख लें। नहाने के बाद इससे बालों की जड़ों में मालिश करें। डैंड्रु दूर हो जाएगी।
  8. दही में बेसन घोलकर बालों की जड़ों में लगाकर एक घंटे बाद सिर धो लें। इससे बालों की डेंड्रफ की समस्या से तो निजात मिलती है।
  9. डेंड्रफ की शिकायत होने पर बालों को दही में कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सिर धोए। यह हफ्ते में दो बार अवश्य करें। इससे बालों की डेंड्रफ तो दूर होगी।
  10. पांच चम्मच पीसें आंवले को रात को आधा कप पानी में भिगो दें, सुबह इस पानी से सिर धो लें। डेंड्रफ से छुटकारा मिल  जाएगा।
  11. चुकंदर के पत्तों को पानी में उबालकर, उस पानी से सिर धोने से डेंड्रफ दूर हो जाती है।
  12. रीठे के पानी से सिर धोने से भी डेंड्रफ से छुटकारा मिल जाता है।
  13. दही को तीन दिन तक रखा रहने दें। इससे करीब आधा घंटा बालों की मालिश करें। इससे डैंड्रफ दूर होती है।
  14. मेथी के कुछ दाने पूरी रात पानी में भिगोकर रखें। सुबह उन दानों को पीसकर पेस्‍ट बना लीजिए। इसे बालों की जड़ों में लगाइए। आधे घंटे बाद सिर धो लीजिए। 
  15. सिरका और पानी बराबर मात्रा में मिलाकर सिर पर लगाएं। इससे आपके बालों से रूसी तो गायब होगी ही साथ ही बाल भी चमकीले बनेंगे।

अगर ये घरेलू टिप्‍स नियमित रूप से अपनाए जाएं तो डेंड्रफ से निजात मिल सकती है। अगर फिर भी आपको आराम न हो तो आप त्‍वचा विशेषज्ञ से संपर्क करें। बालों के रोग कई बार अन्‍य बीमा‍रियों के भी संकेत हो सकते हैं। चिकित्‍सक इस मामले में आपकी बेहतर मदद कर सकेगा।

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14 Feb 2014

खांसी के लिए घरेलू उपचार


खांसी यूं तो एक सामान्‍य बीमारी है, लेकिन यह तकलीफ बहुत देती है। इसे दूर करने के लिए बाजार में मिलने वाली दवायें आपको उनींदा बना सकती हैं। इसलिए आप कुछ कारगर घरेलू उपाय भी आजमा सकते हैं।

खांसी किसी भी समय हो सकती है। वैसे तो सर्दी, खांसी, सिरदर्द, जुकाम जैसी कुछ बीमारियां होती हैं जिनके इलाज के लिए हम चिकित्सक के पास जाने से बचते हैं। खांसी की समस्या होने पर आप सुकून से कोई काम नहीं कर सकते हैं। खांसी किसी भी वजह से हो सकती है। बदलता मौसम, ठंडा-गर्म खा या पी लेना या फिर धूल या किसी अन्यी चीज से एलर्जी के कारण। सूखी खांसी होने पर ज्यादा तकलीफ होती है। आइए हम आपको खांसी से बचने के कुछ उपायों के बारे में बताते हैं।



खांसी से बचाव के लिए घरेलू उपचार
·         गाय के दूध का 15-20 ग्राम घी और काली मिर्च को एक कटोरी में लेकर हल्की आंच में गरम कीजिए। जब काली मिर्च गरम हो जाए तो उसे थोडा सा ठंडा करके लगभग 20 ग्राम पीसी मिश्री मिला दीजिए। उसके बाद काली मिर्च निकालकर खा लीजिए। इस खुराक को दो-तीन दिन तक लेने से खांसी बंद हो जाएगी।
·         तुलसी के पत्ते 5 काली मिर्च, 5 नग काला मनुक्का, 5 ग्राम चोकर (गेहूं के आटे का छान), 6 ग्राम मुलहठी, 3 ग्राम बनफशा के फूल लेकर 200 ग्राम पानी में उबाल लीजिए। जब पानी आधा हो जाए तो उसे ठंडा करके छान लीजिए। फिर गर्म करें और बताशे डालकर रात को सोते समय गरम-गरम पी लीजिए। इस खुराक को 3-4 दिन तक लेने से खांसी ठीक हो जाती है।
·         खांसी होने पर सेंधा नमक की डली को आग पर अच्छे से गरम कर लीजिए। जब नमक की डली गर्म होकर लाल हो जाए तो तुरंत आधा कप पानी में डालकर निकाल लीजिए। सोने से पहले इस पानी को पीने से खांसी में काफी आराम मिलता है।
·         एक ग्राम सेंधा नमक और 125 ग्राम पानी को आधा होने तक उबालिये। सुबह-शाम इस पानी को पीने से खांसी में आराम मिलता है।
·         खांसी आने पर सोंठ को दूध में डालकर उबाल लीजिए। शाम को सोते वक्त इस दूध को पी लीजिए। ऐसा करने से कुछ दिनों में खांसी ठीक हो जाती है।
·         शहद, किशमिश और मुनक्के को मिलाकर खाने से खांसी ठीक हो जाती है।
·         त्रिफला में बराबर मात्रा में शहद मिलाकर पीने से खांसी में फायदा होता है।
·         तुलसी, कालीमिर्च और अदरक की चाय पीने से भी खांसी समाप्त होती है।
·         हींग, त्रिफला, मुलेठी और मिश्री को नींबू के रस में मिलाकर चाटने से भी खांसी में फायदा मिलता है।

सूखी खांसी कुछ ज्यादा ही तकलीफदेह होती है। सूखी खांसी में कफ नहीं आता सिर्फ खांसी आती है जो परेशान करती है। खांसी अगर ज्यादा दिन तक आए तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दो हफ्ते से ज्यांदा खांसी आने पर चिकित्सक से संपर्क अवश्य करना चाहिए।

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