Showing posts with label motivational. Show all posts
Showing posts with label motivational. Show all posts

29 Oct 2018

जैक मा की प्रेरणादायक कहानी Alibaba Founder Jack Ma Success Story Hindi

जब केएफसी कंपनी चीन में आयी तो जॉब पाने के लिए २४ लोग इंटरव्यू देने गए, उनमें से २३ को कम्पनी ने चुन लिया । सिर्फ मुझे रिजेक्ट कर दिया गया । – Jack Ma
चीन के मौजूदा सबसे धनी और प्रसिद्ध व्यक्ति जैक मा ने एक टीवी साक्षात्कार के दौरान ये बात कही ।
दोस्तों आज हम बात करनेवाले हैं अलीबाबा ग्रुप के फाउंडर Jack Ma के बारे में, उनके चीन के एक छोटे से गाँव से निकल कर चीन की सबसे बड़ी कंपनी को स्थापित करने के सफ़र के बारे में ।
लगातार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः उन्होंने जो मुकाम हासिल किया वो हर इंटरप्रेन्योर (उद्यमी) और हर एक स्टूडेंट के लिए प्रेरणा स्रोत है ।
उन्होंने नौकरी के लिए लगभग ३० से ज्यादा बार रिजेक्ट होने के बाद भी हिम्मत ना हार कर संघर्ष किया और आश्चर्य चकित कर देनेवाली सफलता की एक नई कहानी गढ़ दी ।
Jack Ma वर्तमान में एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं, अगस्त २०१७ में उनकी संपत्ति करीब ३६.४ बिलियन अमेरिकी डॉलर है ।
बिज़नेस दुनिया की प्रसिद्ध मैगजीन “फार्च्यून” ने २०१७ की दुनिया के ५० महान लीडर्स लिस्ट में दूसरा स्थान दिया गया है । दुनिया में व्यवसायियों और स्व-उद्धिमीयों में से Jack Ma एक बहुत ही प्रभावशील व्यक्ति हैं ।
वे परोपकारी कार्यो के साथ साथ नई पीढ़ी को बिज़नेस के गुर सिखाने के लिए भी मशहूर हैं ।

बचपन (Childhood)

Jack Ma का जन्म चीन के एक बहुत छोटे-से गाँव में १० सितम्बर १९६४ में हुआ था । उन्होंने बचपन गरीबी का हर वो चेहरा देखा जिसकी कल्पना करना भी हमारे लिए मुश्किल है ।
उन्हें बचपन से ही इंग्लिश भाषा को सीखने, समझने में बहुत दिलचस्पी थी । उस समय कम्युनिस्ट देश चीन की प्रमुख भाषा चीनी ही थी और ६० के दशक में चीनी भाषा को ही महत्व दिया जाता था । इंग्लिश भाषा को सीखने-पढने पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था नाही इसको जरूरी  समझा जाता था ।
बावजूद इसके लगभग १३ साल ही उम्र से ही उन्होंने अंग्रेजी सीखना शुरू कर दिया, बजाये किसी इंग्लिश के शिक्षक के उन्होंने विदेशों से आने वाले टूरिस्ट्स की मदद करना शुरू कर दी और एक टूरिस्ट गाइड की भूमिका निभाने लगे ।
पश्चिमी देशों से आये टूरिस्ट्स से इंग्लिश भाषा में बात करने में शुरुआत में थोड़ी दिक्कतें आयी पर फिर कोशिश करते रहने से उनकी टूटी-फूटी अंग्रेजी में सुधार हो गया ।
उनका बचपन में नाम “मायून” था पर विदेशी पर्यटकों के लिए ये चीनी नाम उच्चारण करने में कठिन था । एक बार उनकी एक विदेशी पर्यटक से उनकी मित्रता हो गई और उसने ही उन्हें “Jack” नाम दिया ।
९ वर्ष तक उन्होंने एक टूरिस्ट गाइड की तरह काम किया जिससे उन्हें पश्चिमी देशों संस्कृति के साथ साथ इंग्लिश की भी बहुत अच्छी समझ हो गई ।

व्यवसाय की शुरुआत (Career)

Jack Ma शुरुआती दिनों में नौकरी की तलाश में भटक रहे थे, पुलिस की नौकरी के लिए भी उन्होंने आवेदन किया था । पर उनकी शारीरिक क्षमता इस नौकरी के अनुरूप ना होने के कारण उन्हें वहां से भी निराशा ही हाथ लगी ।
जैक मा जब अमेरिका गए तो उन्हें वहाँ इंटरनेट के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त हुई, हालाँकि उन्होंने इसके बारे में पहले से सुन रखा था, पर अब उन्हें इसको उपयोग करने का मौका मिला ।
उन्होंने इंटरनेट पर जो पहला शब्द टाइप किया वो था BEER (भालू) । उन्होंने पाया कि दुनिया के बहुत से देशों के भालुओं के बारे में उन्हें जानकारी मिल गई, पर चीन में पाए जानेवाली प्रजातियों के बारे में कोई जानकारी उस वक्त तक इंटरनेट पर मौजूद नहीं थी ।
फिर उन्होंने अलग-अलग चीजें चीन के बारे में सर्च की । पर इंटरनेट पर चीन के बारे में बहुत ही कम जानकारी उपलब्ध थी । जो उन्हें अच्छा नहीं लगा और उन्होंने अपने कुछ मित्रों की मदद से एक वेबसाइट बनाई जो चीन के बारे में जानकारियां देती थी ।
महज कुछ ही घंटो के अन्दर उन्हें बहुत से ईमेल प्राप्त हुए जो लोग Jack के बारे में जानना चाहते थे । अब तक Jack को इंटरनेट की अनंत संभावनाओं का एहसास हो चुका था । इस से पहले वो एक ट्रांसलेशन (अनुवाद) करनेवाली एक छोटी सी एजेंसी चलाते थे । अब जैक इंटरनेट की मदद से कुछ नया करना चाहते थे ।
सन १९९५ में जैक ने अपने कुछ मित्रों और पत्नी की मदद से २०,००० डॉलर जमा किये जिसमे उनकी अपनी बहन से लिए हुए पैसे भी शामिल थे और एक नई वेबसाइट बनाई जो चीन में जो छोटी-बड़ी कंपनियां थी उनको वेबसाइट बनाकर देती थी । इसका नाम उन्होंने “China Yellow Pages” रखा । वांछित लाभ ना मिलने के कारण यह व्यवसाय भी असफल हो गया ।

अलीबाबा कंपनी की शुरुआत (Alibaba Startup)

कुछ दिन सरकारी काम करने के बाद वे वापस गाँव आ गए और उन्होंने अपने १७ मित्रों को इन्वेस्ट करने के लिए रजामंद किया । और इस तरह उन्होंने अपने मित्रों के साथ मिल कर “Alibaba” कंपनी (उस वक़्त एक स्टार्टअप) की नींव रखी ।
शुरुआती दौर में इस कंपनी का ऑफिस अपना खुद का अपार्टमेंट बनाया । इन दिनों अपने मित्रों के इन्वेस्टमेंट के अलावा उनके पास कोई और पूंजी का माध्यम नहीं था परन्तु बाद में १९९९ तक कुछ दूसरी कंपनियों की मदद से उनका निवेश २५ मिलियन डॉलर और बढ़ गया ।
चीन के लोगो का विश्वास जीतने और उन्हें इंटरनेट पर व्यवसाय करना सिखाने के बाद अब ये कम्पनी दुनिया की वृहदतम कंपनियों में से एक बन चुकी है ।
एक छोटे से गाँव के लड़के का सफ़र जिसके पास खर्च ने के लिए एक रुपया भी नहीं था वो इतनी बड़ी कंपनी को स्थापित करने में सफल हुआ सिर्फ इस वजह से क्योंकि उसमे जज्बा था कुछ कर दिखाने का, उसमे ललक थी कुछ कर जाने की और सबसे जरूरी उसमे जिज्ञासा थी हर वक़्त कुछ नया सीखने की ।
जिस इंसान में तलब है सीखने की उसका सफलता की बुलंदियाँ छूना तय है । वो हजार बार असफल होकर भी एक ना एक दिन सफलता के वो पायदान पर पहुँच जाता है जो हमें असंभव जान पड़ते हैं ।

जैक मा की असफलताओं की सीढियाँ (Failures of Jack Ma)

Jack Ma कोई रातों-रात अचानक से कामयाब नहीं हुए उनकी असफलताओं (Failures) की भी एक लम्बी सूची है । और अगर आपको लगता है कि असफलताएं सिर्फ आपको ही मिलती हैं तो जरा Jack Ma के बारे में ये बातें भी जान लीजिये जो उन्हें एक बड़ा योद्धा बनाती है अपनी असफलताओं से लड़ने के लिए ।
वो प्राइमरी स्कूल में भी फेल हुए – एक बार नहीं बल्कि दो-दो बार । जब मिडिल स्कूल में पहुंचे तो ये आंकड़ा और बढ़ गया – और वो तीन बार मिडिल स्कूल में भी फेल हुए ।
जैसे-तैसे स्कूल ख़त्म करके कॉलेज में प्रवेश करने का सोचा तो तीन बार एंट्रेंस एग्जाम में फेल हुए । तक़रीबन १० बार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के लिए अप्लाई किया पर हर बार उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया । कॉलेज के बाद भी उनकी हालात सुधरे नहीं और वो लगभग ३० बार जॉब के लिए अप्लाई किया पर जॉब पाने में भी फेल होते गए ।
उसके बाद खुद का बिज़नेस करने का सोचा और उन्हें शुरूआती दो बार फिर बिज़नेस में असफलता ही हाथ लगी । और यही असफलतायें उनकी सफलताओं के द्वार खोलती चली गई, यही असफलताएं उनकी सफलताओं की सीढियाँ बनती गई ।

जैक मा के कुछ प्रेरक विचार (Inspiring Thoughts of Jack Ma)

इससे फर्क नहीं पड़ता कि मैं फेल हो गया । कम से कम मैंने कांसेप्ट को दूसरों को पास किया । यदि मैं सफल नही भी होता हूँ, तो भी कोई और सफल हो जायेगा ।
इससे फर्क नहीं पड़ता कि भूतकाल कितना कठिन है, आपके पास हमेशा वो सपना होना चाहिए जो आपने पहले दिन देखा था । वो आपको प्रेरित रखेगा और आपको बचाएगा ।
जब हमारे पास पैसे होते हैं तब हम गलतियाँ करना शुरू कर देते हैं ।
आप यह नहीं जानते कि आप अपने जीवन में कितना कुछ कर सकते हैं ।
यदि तुमने कभी कोई कोशिश ही नहीं की तो तुमको कैसे पता चलेगा कि कोई मौका है?
युवाओं की मदद करो, अपने से छोटे लोगों की मदद करो क्योंकि छोटे लोग बड़े होंगे । युवाओं के दिमाग में वो बीज होगा जो आप उनमें बोयेंगे और जब वे बड़े होंगे तो वे दुनिया बदल देंगे ।
दूसरों की सफलता से सीखने की बजाय उनकी गलतियों से सीखो । ज्यादातर लोग जो असफल होते हैं उनकी असफलता के कारण समान होते हैं जबकि सफलता की कई वजहें मिल सकती है
याद रखें जल्दी ही, आपको इस बात का अफ़सोस होगा की आपने अपना पूरा समय काम में व्यतीत कर दिया ।
ज़िंदगी बहुत छोटी है और बहुत खूबसूरत, काम के प्रति इतने गंभीर ना रहें । जीवन का आनंद लें ।
हमारे पास कभी भी पैसों की कमी नहीं होती । हमारे पास कमी होती है तो सपने (Dreams) देखने वाले लोगों की ।

तो मित्रों यह थी Jack Ma की Success Story । हमें आशा है की आपको Jack Ma के जीवन से और उनकी इस Hindi Biography से बहुत ही अनमोल सीख हासिल हुई होंगी ।
मैं कामना करता हूँ कि आप भी Jack Ma की तरह असफलताओं के सामने एक योद्धा बनकर डटकर लड़े और विफलताओं को परास्त कर के सफलता का नया इतिहास लिखे ।
अगर आपको Jack Ma की यह Hindi Biography अच्छी लगी हो तो कृपया इसे ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुँचाए और सोसिअल मीडिया पर शेयर करे । धन्यवाद । 🙂 🙂

7 Nov 2015

जीरो से हीरो- कैसे बने है ये

70 का दशक भारतीय उद्योग को नई दिशा देने वाला माना जा सकता है. यह वह दशक था जब कई उद्यमियों ने आम सोच से हटकर, अपनी आर्थिक, सामाजिक स्थितियों की परवाह न करते हुए अपना छोटा सा कारोबार शुरू किया और आज वे भारत ही नहीं एशिया के करोड़पति-अरबपतियों की सूची में शामिल हैं. नए उद्योगपतियों के लिए इनकी कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं.

किरण मजूमदार शॉ: फोर्ब्स की दुनिया की 50 अरबपति महिलाओं की सूची में शामिल किरण मजूमदार शॉ और इनकी कंपनी बायोकॉन आज किसी परिचय और नाम की मुहताज नहीं है. किरण मजूमदार शॉ कभी अपना कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक परेशानियों से घिरी थीं. कोई भी बैंक इन्हें लोन देने को तैयार नहीं था. नारायण मूर्ति की ही तरह इन्होंने भी 10000 की शुरुआती पूंजी से अपने किराए के मकान से ही बायोकॉन की शुरुआत की थी. बेंगलोर में जन्मी, पली-बढ़ी किरण मजूमदार ने डॉक्टर बनना चाहती थीं. पर डॉक्टरी का सपना छोड़कर इन्होंने बेंगलोर से ही जूलॉजी ऑनर्स किया. साधारण जूलॉजी ऑनर्स की पढ़ाई को ही अपना पेशा बनाते हुए किरण ने 1978 में बायोकॉन की शुरुआत की. पर इसे शुरू करना इतना आसान नहीं था. आज किरण मजूदमदार शॉ के नाम पर लाखों के इंवेस्टमेंट के लिए कई कंपनियां, बैंक तैयार हो जाएंगे, पर तब इस युवा लड़की को इसके नए बिजनेस की शुरुआत के लिए बैंक ने लोन देने से मना कर दिया था. इसके अलावे भी कई मुश्किल हालात थे. भारत जैसे देश में जहां मूलभूत बिजली और शुद्ध पानी की आपूर्ति करना भी एक समस्या है, किरण ने एक फॉर्मास्यूटिकल कंपनी शुरू करने का साहस किया था. उस पर भी आर्थिक तंगी के हालात में कंपनी शुरू करने के लिए कोई जगह किराए पर लेना भी संभव नहीं था. कंपनी के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की भर्ती करना एक चुनौती है. एक तो नई कंपनी, उस पर काम के लिए जरूरी वेतन देना, हर चीज चुनौतीपूर्ण था. पर इन सारी चुनौतियों को पार करते हुए किरण ने बायोकॉन शुरू किया. इतना ही नहीं एक साल के अंदर यह भारत से अमेरिका और यूरोप को एंजाइम निर्यात करने करने वाली पहली कंपनी बन गई. आज बायोकॉन भारत की प्रतिष्ठित कंपनियों में है और इसकी संपत्ति अरबों की है.

धीरूभाई अंबानी: धीरजलाल हीरालाल अंबानी बाद में धीरूभाई अंबानी (Dhirubhai Ambani) के नाम से जाने गए. आज शायद देश का बच्चा-बच्चा धीरूभाई अंबानी और रिलायंस इंडस्ट्रीज का नाम जानता हो. पर एक सामान्य गुजराती शिक्षक परिवार से ताल्लुक रखनेवाले धीरूभाई अंबानी से भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी का मालिक करोड़पति धीरूभाई अंबानी बनना इतना आसान नहीं था. कहते हैं कारोबार का कीड़ा धीरूभाई के दिमाग में पहले ही था. पर पैसों की तंगी के कारण ऐसा संभव नहीं था. धीरूभाई अंबानी केवल 500 रु. लेकर विदेश गए और 15000 की जमा-पूंजी के साथ 1962 में भारत लौटकर रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना की. 1977 में पब्लिक जानकारी में आई आरआईएल की 2007 तक 60 बिलियन डॉलर संपत्ति ने अंबानी परिवार को दुनिया के दूसरे सबसे अमीर परिवारों की श्रेणी में ला दिया. आज आरआईएल पेट्रोकेमिकल्स (petrochemicals), रिफाइनिंग (refining), ऑयल एंड गैस (oil and gas) आदि कई क्षेत्रों में अपने व्यापार कर रहा है.

सुनील मित्तल (Sunil Mittal): भारती एयरटेल के मालिक सुनील भारती पहले भारतीय माने जाते हैं जिन्होंने टेलीकम्यूनिकेशन में उज्ज्वल भविष्य देखते हुए टेलीकम्यूनिकेशन को बिजनेस का आधार बनाया और भारती एंटरप्राइज की स्थापना की. 18 साल की उम्र में अपने पिता से 20 हजार रुपए उधार लेकर उन्होंने अपना पहला बिजनेस शुरू किया था. 1980 में अपने भाई के साथ मिलकर भारती ओवरसीज ट्रेडिंग लिमिटेड की स्थापना की. वे जापान से सुजुकी मोटर्स की पोर्टेबल इलेक्ट्रिक जेनेरेटर्स के आयात के बिजनेस में थे, पर अचानक ही भारत सरकार ने इस पर बैन लगा दिया. उस समय सुनील मित्तल के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई, कि अब क्या? फिर 1984 में उन्होंने पुश-बटन फोन का बिजनेस शुरू किया. 1992 में बीटल के नाम से आंसरिंग मशीन फोन बनाना शुरू किया. बीटल सक्सेसफुल रहा. 1992 में उन्होंने मोबाइल फोन नेटवर्क नीलामी (mobile phone network licences auctioned ) में बिड किया. इसकी प्रमुख शर्त थी कि बिडर को मोबाइल ऑपरेटिंग में एक्सपीरिएंस होना चाहिए. अत: फ्रेंच टेलीकॉम ग्रुप विवेंदी का लाइसेंस मित्तल को मिल गया. 1994 में उनके मोबाइल टेलीकॉम बिजनेस को भारत सरकार द्वारा मान्यता मिल गई. 1995 में भारती सेल्यूलर लिमिटेड (बीसीएल) के अंतर्गत एयरटेल (AirTel) के नाम सेल्यूलर सर्विस दिल्ली में शुरू हुई. आज भारती एयरटेल की संपत्ति, सेवा और नाम से हर कोई परिचित है.

---------------------------------------------------------------------
निवेदन :कृपया अपने comments के through बताएं की ये Hindi Article आपको कैसा लगा .
यदि आपके पास Hindi में कोई article, good  news; inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथshare करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: bhaveshabvp@gmail.comपसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!

25 May 2014

सफलं होने के 10 तरीके


सफलता एक ऐसा शब्द है जिसे अपने जीवन से हर व्यक्ति जोड़ना चाहता है । पर क्या जितनी आसानी से हम ये चाहते है उसी आसानी से ही सफलता हमे मिल जाती है?


नहीं, friends ये इतना आसान नहीं है अपर असंभव भी नहीं है हाँ थोड़ा कठिन जरुर है क्योंकि सफलता की चोटी तक पहुचने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है और continuously लगे रहना पड़ता है । जब तक desire success मिल नहीं जाती

क्या कभी आप ने सोचा है कि सफल लोगों के पास success और लोकप्रिय बनने की ऐसी कौन सी key होती है? जिससे वो अपने जीवन की peek success को प्राप्त करते है।

Friends, सफल लोगों के पास लोकप्रिय व सफल बनने कि योजना होती है । जो लोग चोटी पे पहुचते हैं वे इस बारे में ज्यादा सोचते है कि वे वो ऐसी कौन सी Technic अपनाएँ जो लोग उनसे प्रभावित हो और वो उन लोगों के बीच अपनी पहचान बनाएं।

आप लोगों को ये जानकर surprise होगा कि सफल व महान व्यक्तियों के पास लोगों को प्रभावित करने कि एक स्पष्ठ, निर्धरित योजना होती है जिसका वो नियमित follow करते हैं, अपनी सफलता को पाने के लिए और उसे हमेशा  बनाये रखने के लिए

आज मैं यहाँ पे president लिंडन जॉन्सन के दस सूत्रीय कार्यक्रम के बारे में बात करने जा रही हूँ जिसको उन्होंने अपने president बनने से पहले तैयार किया था। इतिहास गवाह है कि उन्होंने इन rules को हमेशा अपने जीवन में उतारा और बुलंदियों को छुआ । इन rules का जिक्र मशहूर लेखक David J. Schwartz ने अपनी book “बड़ी सोच का जादूमें किया है । 

ये rules इस प्रकार हैं:-  
  1. एक ऐसा हँसमुख व्यक्ति बनिए, जिसके साथ होने पर कोई तनाव में ना रहे।  
  2. अपने मष्तिष्क को शांत रखने कि आदत डालिए ताकि कठिन परिस्थितियों में आप उत्तेजित या परेशान ना हो पाएं। और सही निर्णय ले सकें ।
  3. नाम याद रखने कि आदत डाले । अगर आप ऐसा नहीं करते है तो सामने वाले को यह लग सकता है कि आपकी उनमे रूचि नहीं है।
  4. बड- बोल मत बोलिए। अर्थात ऐसी बड़ी बड़ी बाते मत बोलिए जिससे आप का ही रोब झलके। सामने वाले को यह एहसास न होने दें कि आप खुद को ही सर्व ज्ञानी समझते हैं और सामने वाला आप के समक्ष कुछ भी नहीं है।
  5. अपने आप को दिलचस्प बनाइये जिससे लोग आप का साथ पसंद करें। आप के आस पास रहना चाहें।
  6. आप अपने जीवन और व्यवहार से ऐसे तत्वों को निकल दीजिये जो आप के  जीवन में दुःख का कारण बने या यूँ कहें कि ऐसे तत्वों को निकाल दे जो आप के व्यक्तित्व में चुभते हों ।
  7. विशुद्ध भावनावों के साथ हर miss understanding को दूर करने की पूरी कोशिश करें और जल्द से जल्द शिकायतों को नाली में बहा दें।
  8.  लोगों को पसंद करने की आदत डालें। और कुछ समय बाद आप सचमुच उन्हें पसंद करने लगेंगे ।
  9. हमेशा लोगों कि सफलता व उनकी उपलब्धियों पर उन्हें बधाई देने का मौका मत गवाइए । औए ना ही किसी के दुःख या उनकी निराशा में अपनी संवेदना जताने का अवसर खोइए।  
  10.  हर पल लोगों की help करने के लिए तैयार रहिये। लोगों को आध्यात्मिक शक्ति दीजिये और वे आप को पसंद करने लगेंगे।  

इन ten आसान परन्तु बेहद प्रभावी नियमों कि वजह से president जॉन्सन को मतदाताओं ने पसंद किया और वो एक साधारण व्यक्ति से America के president बनें।

20 May 2014

मॉडर्न कारों के जनक हैनरी फोर्ड का प्रेरणादायी जीवन


रास्ते की दूरियों को पलक झपकते दूर करती चमचमाती मोटरगाङियाँ, आज स्टेटस सिम्बल ही नही हैं बल्कि तेज रफ्तार जिंदगी की आवश्यकता है। भागती-दौङती जिंदगी को कारों के माध्यम हैनरी फोर्ड ने कुछ आसान बना दिया। कार को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने का श्रेय हैनरी फोर्ड को ही जाता है।
इस युग को नया औद्योगिक आयाम देने वाले हैनरी फोर्ड काजन्म अमेरीका के मिशिगन राज्य में डियर बोर्ध नामक स्थान पर 30 जुलाई, 1863 को हुआ था। हेनरी को आर्थिक उत्थान के आवश्यक सभी गुंण, अपनी माता मेरीलिटोगोट से विरासत में मिले थे। हैनरी के पिता विलयम फोर्ड एक साधारण किसान थे।

पाँच वर्ष की आयु में हैनरी का दाखिला पास ही के कस्बे के स्कूल में कराया गया था। पाँचवी पास करने के बाद आगे की पढाई के लिए हैनरी को घर से ढाई किलोमीटर पैदल जाना पङता था। पिता की यही इच्छा थी कि हैनरी एक अच्छा किसान बने किन्तु हैनरी का दिमाग दूसरी दिशा में व्यस्त रहता था। 11 वर्ष की उम्र में हैनरी के खिलौने आम बच्चों से अलग हट कर थे। चाय की केतली, खाङी हल तथा छोटे-छोटे पुर्जे उनके खिलौने हुआ करते थे। बहुत कम उम्र में ही वे पड़ोसीयों की घङियाँ सुधारने लगे थे। ये बात पिता को अच्छी नही लगती थी और वे उन्हे ठठेरा कहा करते थे।
हेनरी जब मिशिगन राज्य में पढाई कर रहे थे, तब उन्होने खाङी में बाधँ बना दिया था जिसके कारण एक किसान के खेत मे पानी भर गया था और वे अध्यापक महोदय से शिकायत करने स्कूल पहुँच गया। अध्यापक महोदय को हैनरी की बुद्धिमता पर आश्चर्य भी हुआ किन्तु किसान का नुकसान हुआ था, इसलिए उन्होने हैनरी को बाँध तोङने की आज्ञां दी तथा किसान को संतुष्ट करने के लिए हैनरी को डांट भी लगाई।

शुरूवाती दौर में घङी सुधारने वाले हैनरी फोर्ड ने मोटरकार के आविष्कार तथा उसमें आधुनिक सुधार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिता की इच्छा के विरुद्ध हैनरी डेट्राइट चले आए और एक कारखाने में काम करने लगे किन्तु वहाँ से प्राप्त आमदनी से कार बनाने के सपने को साकार नही सकते थे। अतः एक सुनार के यहाँ पार्टटाइम काम करने लगे और शाम को घङियाँ भी सुधारते। डेट्राइट में रहते हुए कुछ ही समय हुआ था कि पिताजी की तबियत खराब होने का संदेश आया और वे घर वापस चले गये। खेत की पूरी जिम्मेदारी अब हैनरी के कंधो पर आ गई थी।
हैनर साल भर तक खेतों काम करते रहे। इस काम के दैरान हैनरी को लगा कि इस काम में काफी समय लगता है, अतः उन्होने विचार किया कि कृषि कार्यो में विज्ञान का प्रयोग करना चाहिए। उन दिनों ट्रैक्टर और फोडेशन का कहीं नामो निशान भी नही था। हैनरी ने खेती में काम आने वाले भाप के इंजनो में सुधार किया। आस-पास के किसानो के इंजन को सुधारने काम करने लगे। हैनरी के प्रयास से ऐसी विधियों का विकास हुआ जिससे एक वर्ष की फसल में केवल एक महीने ही काम करने की आवश्यकता होती थी। इसी बीच उनकी मुलाकात एक इंजन निर्माण कंपनी के प्रतिनिधि से हुई, उसने हैनरी को पूरे क्षेत्र का इंजन सुधारने का अनुबंध दिया।

हैनरी ने ट्रैक्टर की कल्पना की और घर पर ही एक बेलन बना दिया। बेलन में एक बेकार पङे घास काटने की मशीन के पहिए लगाए तथा परिक्षण के लिए गाङी को चलाया । गाङी चालिस फुट तक चलकर रुक गई। सामान्य लोगों की नजर में ये प्रयोग सफल नही था, परंतु हैनरी का मानना था कि यदि गाङी आज 40 फुट चली है तो कल ज्यादा दूर भी चलेगी। हैनरी का मोटर कार का सपना साकार होने लगा था। वे 1891 में वापस डेट्राइट आए और रात में एलिस लाइटिंग कंपनी में काम करने लगे तथा दिन में लगों की टिप्पणियों से बेखबर मोटर कार पर प्रयोग करते रहे। उनकी बनाई कार लगभग दो वर्षों में बनकर तैयार हुई।

अप्रैल का महिना था, थोङी बूंदा-बाँदी हो रही थी। हैनरी अपनी पत्नी क्लारा के साथ बिना घोङे वाली गाङी को परखने के लिए निकल पङे। इस गाङी में टायर ओर गद्दी को छोङकर सभी भाग हैनरी के आविष्कार का ही परिणाम था। गाङी तेज आवाज करती हुई धुंआ छोङती हुई गली तक पहुँची। लोग आवाज सुनकर घरों से बाहर आ गये। सभी ने पहली बार बिना घोङे वाली गाङी देखी थी। इस सफलता ने फोर्ड के आत्मविश्वास को हौसला दिया। उस गाङी में उस समय बैक गेयर का प्रवधान नही था, अतः गाङी को वापस पिछे धक्का देकर पुनः स्टार्ट किया गया। ये गाङी भले ही आज जैसी गाङी नही थी, परंतु सभी गाङियों की जननी इसे कहा जा सकता है।


इसके बाद हैनरी फोर्ड ने गाङियों में अनेक सुधार किये। कार बनाने के लिए एक कारखाना भी खोले। सम्पन्न घरों के लोग उनकी गाङियों को खरीदने लगे। हैनरी फोर्ड की कल्पना हक़ीक़त में साकार हो गई थी। उनका कहना था कि उन्होने कभी सपने में भी नही सोचा था कि इस प्रयोग से वे धन कमाएंगे। लेकिन जीवन के अंतिम दिनो में वे विश्व के सबसे धनि व्यक्ति थे।

फोर्ड कंपनी का कारखाना लगभग 200 एकङ जमीन पर फैला हुआ है। जिसमें पाँच सौ विभाग तथा हजारों लोग काम करते हैं। औद्योगिक को नया आयाम देने वाले फोर्ड मानविय करुणा की आवाज को भी सुनते थे। वैज्ञानिक एडिसन जैसे कई बुद्धिजीवी लोग उनके मित्र थे। मशीनों के बीच रहते हुए भी उनका मन मानव सेवा के लिए तत्पर रहता था। हैनरी फोर्ड अपनी आमदनी का एक अंश मानव कल्याण की सेवा में भी लगाते थे।

83 वर्ष की उम्र में 7 अप्रैल 1947 में हैनरी फोर्ड इहलोक छोङकर परलोक सिधार गये। आज भी दुनिया उनके आविष्कार से लाभान्वित हो रही है। घङियाँ सुधारने वाले हैनरी फोर्ड ने दुनिया को कार बनाना सिखा दिया। हैनरी फोर्ड ने ये सिद्ध कर दिया कि, मेहनत, हिम्मत और लगन से कल्पना साकार होती है। 
————————————————


यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: bhaveshabvp@gmail.com .पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!

खुश रहने वाले लोगों की 7 आदतें



Friends, खुश  रहना  मनुष्य  का जन्मजात  स्वाभाव  होता  है . आखिर  एक  छोटा  बच्चा  अक्सर  खुश  क्यों  रहता  है ? क्यों  हम  कहते  हैं  कि  childhood days life के  best days होते  हैं ? क्योंकि  हम  पैदाईशी  HAPPY होते  हैं ;  पर  जैसे -जैसे  हम  बड़े  होते  हैं  हमारा  environment, हमरा समाज  हमारे  अन्दर  impurity घोलना  शुरू  कर  देता  है ….और  धीरे -धीरे  impurity का  level इतना  बढ़  जाता  है  कि  happiness का  natural state sadness के  natural state में  बदलने  लगता  है .
पर  ऐसा  सबके  साथ  नहीं  होता  है  दुनिया  में  ऐसे बहुत से  लोग  हैं  जो  अपनी  Hap
py रहने  की  natural state को  बचाए  रख  पाते  हैं  और  Life-time खुशहाल  रहते  हैं .
 तो  क्या  ऐसे  व्यक्ति  हमेशा  खुश  रहते  हैं ?  नहीं , औरों  की  तरह  उनके  जीवन  में  भी  दुःख-सुख  का  आना  जाना  लगा  रहता  है ,  पर  आम तौर  पर  ऐसे  व्यक्ति  व्यर्थ की   चिंता  में  नहीं  पड़ते और  अक्सर  हँसते -मुस्कुराते  और  खुश  रहते  हैं .
तो  सवाल  ये  उठता  है  कि  जब  ये  लोग  खुश  रह  सकते  हैं  तो बाकी  सब  क्यों  नहीं ?आखिर उनकी ऐसी कौन सी आदतें हैं जो  उन्हें दुनिया भर की टेंशन के बीच भी खुशहाल बनाये रखती हैं आज  इस  लेख  के  जरिये  मैं  आपके  साथ  खुशहाल लोगों की 7 आदतें share करने जा रहा हूँ  जो  शायद  आपको  भी  खुश  रहने  में  मदद  करें .तो  आइये  जानते  हैं उन सात आदतों को :

Habit 1: खुश  रहने  वाले  अच्छाई  खोजते  हैं  बुराई  नहीं :
Human beings की  natural tendency होती  है  कि  वो  negativity को  जल्दी  catch करते  हैं . Psychologists इस  tendency को  “Negativity bias” कहते  हैं .  अधिकतर  लोग  दूसरों  में  जो कमी  होती  है  उसे  जल्दी देख  लेते  हैं  और  अच्छाई  की  तरफ  उतना  ध्यान  नहीं  देते  पर  खुश  रहने  वाले  तो  हर एक चीज  में , हर एक  situation में  अच्छाई  खोजते  हैं , वो  ये  मानते  हैं  कि  जो  होता  है  अच्छा  होता  है .  किसी  भी  व्यक्ति  में  अच्छाई  देखना  बहुत  आसान  है ,बस  आपको  खुद  से  एक  प्रश्न  करना  है , कि , “ आखिर  क्यों  यह  व्यक्ति  अच्छा  है ?” , और  यकीन  जानिये  आपका  मस्तिष्क  आपको  ऐसी  कई  अनुभव और  बातें  गिना  देगा  की  आप  उस  व्यक्ति  में  अच्छाई  दिखने  लगेगी .
एक  बात  और , आपको  अच्छाई  सिर्फ  लोगों  में  ही  नहीं  खोजनी  है , बल्कि  हर एक  situation में  आपको  positive रहना  है  और  उसमे  क्या  अच्छा  है  ये  देखना  है . For example , अगर  आप  किसी  job interview में  select नहीं  हुए  तो  आपको  ये  सोचना  चाहिए  कि  शायद  भागवान  ने  आपके  लिए  उससे  भी  अच्छी  job रखी  है जो आपको देर-सबेर  मिलेगी, और आप किसी अनुभवी व्यक्ति से पूछ भी सकते हैं, वो भी आपको यही बताएगा .

Habit 2: खुश  रहने  वाले  माफ़  करना  जानते  हैं  और  माफ़ी  माँगना  भी :
हर  किसी  का  अपना -अपना  ego होता  है , जो  जाने -अनजाने  औरों  द्वारा  hurt हो  सकता  है . पर  खुश  रहने  वाले  छोटी -मोती  बातों को  दिल  से  नहीं  लगाते  वो   माफ़  करना  जानते  हैं , सिर्फ  दूसरों  को  नहीं  बल्कि  खुद  को  भी .
और  इसके  उलट  यदि  ऐसे  लोगों  से  कोई  गलती  हो  जाती  है , तो  वो  माफ़ी  मांगने  से  भी  नहीं  कतराते . वो  जानते  हैं  कि  व्यर्थ  का  ego उनकी  life को  complex बनाएगा  इसलिए  वो  “Sorry” बोलने  में  कभी  कंजूसी  नहीं  करते . मुझसे  भी जब गलती होती है तो मैं  कभी  उसे  सही  ठहराने  की  कोशिश  नहीं करता  और  उसे  स्वीकार  कर  के  क्षमा  मांग  लेता  हूँ .
माफ़  करना  और  माफ़ी  माँगना  आपके  दिमाग  को  हल्का  करता  है , आपको  बेकार   की  उलझन  और  परेशान  करने  वाली  thoughts से  बचाता  है , और  as a result आप  खुश  रहते  हैं .

Habit 3: खुश  रहने  वाले  लोग  अपने  चारो  तरफ  एक  strong support system develop करते  हैं :
ये   support system दो  pillars पे  टिका  होता  है  Family and Friends( F&F). ज़िन्दगी  में  खुश  रहने  के  लिए   F&F का  बहुत  बड़ा  योगदान  होता  है . भले  आपके  पास  दुनिया  भर  की  दौलत  हो  , शोहरत  हो  लेकिन  अगर  F&F नहीं  है  तो  आप  ज्यादा  समय  तक  खुश  नहीं  रह  पायेंगे .
हो  सकता  है  ये  आपको  बड़ी  obvious सी  बात  लगे , ये  लगे  की  आपके  पास  भी  बड़े  अच्छे  दोस्त   हैं  और  बहुत  प्यार  करने  वाला  परिवार  है , लेकिन  इस  पर  थोडा  गंभीरता  से  सोचिये . आपके  पास  ऐसे  कितने   friends हैं , जिन्हें  आप  बिना  किसी  झिझक  के  रात  के  3 बजे  भी  phone कर  के  उठा सकें  या कभी भी financial help ले सकें?
Family and friends को  कभी  भी for granted नहीं  लेना  चाहिए , एक  strong relationship बनाने  के  लिए  आपको  अपने  हितों  से  ऊपर  उठ  कर  देखना  होता  है . , दूसरे  की  care करनी  होती  है , और  उन्हें   genuinely like करना  होता  है . जितना  हो  सके  अपने  रिश्तों  को  बेहतर  बनाएं  , छोटी -छोटी  चीजें  जैसे  कि  Birthday wish करना, बधाई  देना , सच्ची  प्रशंशा  करना , मुस्कुराते  हुए  मिलना , गर्मजोशी  से  हाथ  मिलाना , गले  लगना  आपके  संबंधों  को  प्रगाढ़  बनता  है . और  जब  आप  ऐसा  करते  हैं  तो  बदले  में  आपको  भी  वही  मिलता  है और  आपकी  ज़िन्दगी  को  खुशहाल  बनाता  है .

Habit 4: खुश  रहने  वाले  अपने  मन  का  काम  करते  हैं  या  जो  काम  करते  हैं  उसमे  मन  लगाते हैं :
यदि  आप  अपने  interest का,  अपने  मन  का  काम  करते  हैं  तो  definitely वो  आपके  Happiness Quotient को  बढ़ाएगा ,  लेकिन  ज्यादातर  लोग  इतने  lucky नहीं  होते , उन्हें  ऐसी  job या  business में  लगना   पड़ता  है  जो  उनके  interest के  हिसाब  से  नहीं  होतीं . पर  खुश  रहने  वाले  लोग  जो  काम  करते  हैं  उसी  में  अपना  मन  लगा  लेते  हैं , भले  ही  parallely वो  अपना  पसंदीदा  काम   पाने  का  प्रयास  करते  रहे .
मैंने  कई  बार  लोगों  को जहाँ job करते हैं उस  company की  बुराई  करते  सुना  है , अपने  काम  को  दुनिया  का  सबसे  बेकार  काम  कहते  सुना  है , ऐसा  करना  आपकी  life को  और  भी  difficult बनता  है . खुश  रहने  वाले  अपने  काम  की  बुराई  नहीं  करते  , वो  उसके   सकारात्मक  पहलुओं  पर  focus करते  हैं  और  उसे  enjoy करते  हैं .
मगर  , यहाँ  मैं  यह  ज़रूर  कहना  चाहूँगा  कि   यदि  हम  दुनिया  के  सबसे  खुशहाल  लोगों को देखें  तो  वो  वही लोग  होंगे  जो  अपने  मन  का  काम  करते  हैं , इसलिए  यदि  आप  जो  कर  रहे  हैं  उसे   enjoy करना  , उससे   सीखना  अच्छी  बात  है   पर  Steve Jobs  की कही बात भी याद रखिये: “आपका काम आपकी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा होगा, और truly-satisfied होने का एक ही तरीका है की आप वो करें जिसे आप सच-मुच एक बड़ा काम  समझते होंऔर बड़ा काम करने का एक ही तरीका है की आप वो करें जो करना आप enjoy करते हों.

Habit 5: खुश  रहने  वाले  हर  उस  बात  पर  यकीन  नहीं  करते  जो  उनके  दिमाग  में  आती  हैं :
Scientists के अनुसार  हमारा  brain हर  रोज़  60,000 thoughts produce करता  है  , और  एक  आम  आदमी  के  case में  इनमे  से  अधिकतर  thoughts negative होती  हैं . अगर  आप  daily अपने  brain को  हज़ारों  negative thoughts से  feed करेंगे  तो  खुश  रहना  तो  मुश्किल  होगा  ही . इसलिए  खुश  रहने  वाले  व्यक्ति   दिमाग  में  आ  रहे     बुरे  विचारों  को  अधिक  देर  तक  पनपने  नहीं  देते . वो  benefit of doubt देना   जानते  हैं , वो  जानते  हैं  कि  हो  सकता  है  जो  वो  सोच  रहे  हैं  वो  गलत  हो  , जिसे  वो  बुरा  समझ  रहे  हैं  वो  अच्छा  हो . ऐसा  कर  के  इंसान  relax हो  जाता  है , दरअसल  हमारी  सोच  के  हिसाब  से  brain में  ऐसे  chemical release होते  हैं  जो  हमारे  मूड  को  खुश  या  दुखी  करते  हैं .
जब  आप  नकारात्मक  विचारों  को  सच  मान  लेते  हैं  तो  आप  का  blood pressure बढ़ने  लगता  है  और  आप  tensionize हो  जाते  हैं , वहीँ  दूसरी  तरफ  जब  आप  उस  पर  doubt कर  देते  हैं  तो  आप  अनजाने  में  ही  brain को  relaxed रहने  का  signal दे  देते  हैं .

Habit 6: खुश  रहने  वाले  व्यक्ति  अपने  जीवन  या  काम  को  किसी  बड़े  उद्देश्य  से जोड़ कर देखते हैं :
एक  बार  एक  बूढी  औरत  कहीं  से आ  रही  थी  कि  तभी  उसने  तीन  मजदूरों  को  कोई  ईमारत बनाते  देखा  . उसने  पहले  मजदूर  से  पूछा  ,” तुम  क्या  कर  रहे  हो  ?”, “ देखती  नहीं  मैं  ईंटे  ढो   रहा  हूँ .” उसने  जवाब  दिया .
फिर  वो  दुसरे  मजदूर  के  पास  गयी  और उससे  भी  वही  प्रश्न किया ,” तुम  क्या  कर  रहे  हो ?” ,” मैं  अपने  परिवार  का  पेट  पालने  के  लिए  मेहनत मजदूरी  कर  रहा  हूँ ?’ उत्तर  आया  .
फिर वह  तीसरे  मजदूर  के  पास  गयी  और  पुनः  वही  प्रश्न   किया ,” तुम  क्या  कर  रहे  हो ?,
उस  व्यक्ति  ने  उत्साह  के  साथ  उत्तर  दिया , “ मैं  इस  शहर  का  सबसे  भव्य   मंदिर  बना  रहा  हूँ ”
आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इन तीनों में से कौन  सबसे अधिक खुश होगा!
दोस्तों, इस  मजदूर  की  तरह  ही  खुश  रहने  वाले  व्यक्ति  अपने  काम   को  किसी  बड़े  उद्देश्य   से  जोड़   कर  देखते  हैं , और   ऐसा  करना  वाकई  उन्हें  आपार  ख़ुशी  देता  है . ऐसा  मैं  इसलिए  भी  कह  पा  रहा  हूँ  क्योंकि  मैं Zindgi ki ABCD को  भी  कुछ  इसी  तरह  देखता  हूँ .  मैं  ये  सोचता  हूँ  कि  इस  site के  जरिये  मैं  लाखों -करोड़ों  लोगों  की  ज़िन्दगी  को  बेहतर  बना  सकता  हूँ . मैं  हमेशा  यही  प्रयास  करता  हूँ  कि  कैसे  अच्छी  से  अच्छी  बातें  share करूँ  कि  पढने  वालों  की  life में  positive changes आएं , और  शायद  यही  वज़ह  है  कि  मैं  इस  काम   से  कभी  थकता  नहीं  हूँ  और  इसे  कर  के  सचमुच  बहुत  खुश  और  संतुष्ट  होता  हूँ .

Habit 7: खुश  रहने  वाले व्यक्ति अपनी  life में  होने  वाली  चीजों  के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हैं :
खुश  रहने वाले व्यक्ति  responsibility लेना  जानते  हैं . अगर  उनके  साथ  कुछ  बुरा  होता  है  तो  वो  इसका  blame दूसरों  पर  नहीं  लगाते , बल्कि  खुद  को  इसके  लिए  जिम्मेदार  मानते  हैं .For example:अगर  वो  office के  लिए  late होते  हैं  तो  traffic jam को  नहीं  कोसते  बल्कि  ये  सोचते  हैं  कि  थोडा  पहले  निकलना  चाहिए  था .
अपनी  success का  credit दूसरों  को  भले  दे  दें  लेकिन  अपनी  failure के लिए खुद को ही जिम्मेदार मानें  . जब  आप  अपने  साथ  होने  वाली  बुरी  चीजों  के  लिए  दूसरों  को  दोष  देते  हैं  तो  आपके  अन्दर  क्रोध  आता  है , पर  जब  आप  खुद  को  जिम्मेदार  मान  लेते  हैं  तो  आप  थोडा  disappoint होते  हैं  और  फिर चीजों  को  सही करने के प्रयास में जुट जाते हैं . मैं  खुद   भी  अपनी  life में  होने  वाली  हर  एक  अच्छी  – बुरी  चीज  के  लिए  खुद  को  जिम्मेदार  मानता  हूँ . ऐसा  करने  से  मेरी  energy दूसरों  में  fault खोजने  की  जगह  खुद  को  improve करने  में  लगती  है , और  ultimately मेरी  happiness को  बढाती  है .
Friends, हो  सकता  है  आप  इनमे  से  कुछ बातों  को  already follow करते  हों  partially या  शायद  पूरी  तरह  से . पर  यदि  किसी  भी  Habit में  खुद  को  थोडा  सा   भी  improve करेंगे  तो  वो  definitely आपकी  happiness को  बढ़ाएगा . Personally मुझे  Habit 2 में  माफ़  करने  वाले  part को  improve करना  है .  तो  चलिए  हम  सब  साथ -साथ  अपने  Happiness Quotient को  बढ़ाते  हैं  और  एक  खुशहाल  जीवन  जीने  का  प्रयास  करते  हैं .
All the best! 
—————————————————-
निवेदन : यदि  यह  लेख  आपके लिए लाभप्रद रहा हो तो कृपया  कृपया  comment के  माध्यम  से  मुझे बताएं.और इसे अपने Facebook friends  के साथ ज़रूर share करें .

यदि आपके पास English या Hindi में कोई  article,  inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: bhaveshabvp@gmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!