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7 Nov 2015

20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य


how to know your purpose of life Hindi
दोस्तों  आज  Zindgi ki ABCD  पर  मैं  आपके  साथ  कुछ  special share करने  जा  रहा  हूँ . Special इसलिए  क्योंकि   आज  मैंने   जो  article   Hindi में  translate किया  है  वो  एक  ऐसे  व्यक्ति  द्वारा  लिखा  गया  है  जिन्हें  मैं  अपना  on-line गुरु  मानता   हूँ .  उनका  नाम  है  Steve Pavlina.  उन्होंने  अपने   articles से  करोड़ों  लोगों  के  जीवन  में  एक   positive बदलाव  लाया  है . और  आज  जो  article मैं  आपसे  share कर  रहा  हूँ  वो  उनके  द्वारा   लिखे  गए   सबसे  ज्यादा  पढ़े  जाने   वाले   articles में  से  एक  है . इसे  बड़े  धयन  से  पढ़िए  क्योंकि  यहाँ  से  आप  जान  सकते  हैं  अपने   जीवन  का   उद्देश्य .

How to Discover Your Life Purpose in About 20 Minutes

लगभग   20 मिनट  में  जानें  अपने जीवन  का उद्देश्य 

आप  अपने  जीवन  का   असली  उद्देश्य   कैसे  पता  करेंगे ? मैं  आपकी  job के  बारे  में  बात  नहीं  कर  रहा  हूँ  , या  फिर  आपकी  रोज़मर्रा  की  जिम्मेदारियों  या  आपके  long term goals के  बारे  में  भी  बात  नहीं  कर  रहा  हूँ . मेरा  मतलब  उस  असली  वजह  से  है  जिसके  लिए  आप  यहाँ  हैं —वो  वजह   जिसके
लिए  आप  exist करते  हैं .
या  शायद  आप  एक   नास्तिक  व्यक्ति  हैं  जो  ये  सोचता  है  कि  उसके  जीवन  का  कोई  उद्देश्य  नहीं  है , और  ज़िन्दगी  का  कोई  मतलब  नहीं  है . इससे  कोई  फरक  नहीं  पड़ता . इस  बात  में  यकीं  रखना  की  life का  कोई  purpose नहीं  है  आपको  इसे  discover करने  से  नहीं  रोकता , ठीक  वैसे  ही  जैसे  गुरुत्वाकर्षण  में  यकीं  नहीं   होना  आपको  घूमने-घामने   से  नहीं  रोक  सकता . यकीं  ना  होने  से  बस  समय  थोडा  ज्यादा  लगेअगा , तो  अगर  आप  इस  तरह  के  व्यक्ति  हैं  तो  इस  पोस्ट  के  Title में  जो  नंबर  है  उसे  20 से  बढ़ा  कर  40 कर  दें  (या  60 अगर  आप  सच -मुच  जिद्दी  हैं ). ज्यादा  chance है  कि   अगर  आप  ये  believe करते  हैं  कि  आपकी  life का  कोई  purpose नहीं  है  तो  मैं  जो  कुछ  कह  रहा  हूँ  आप  उसमे  भी  believe नहीं  करेंगे , पर  फिर  भी , एक  घंटा  देने  में  क्या  जाता  है , क्या  पता  कुछ  पता  ही  चल  जाये ?
Bruce Lee के  बारे   में  एक  छोटी  सी  कहानी  बात  कर  मैं  इस  छोटी  सी  exercise का  stage सेट  करता  हूँ . एक  martial artist ने  Bruce से  कहा  कि  तुम  martial arts के  बारे  में   जो  कुछ  भी  जानते  हो  मुझे  सिखा  दो .Bruce  ने  पानी  से  भरे  दो  कप  लिए  और  कहा  “ पहला  कप  martial arts के  बारे  में  जो  भी  तुम्हारा   ज्ञान  है  उसे  दर्शाता  है , दूसरा  कप  martial srts के  बारे  में  मेरे  ज्ञान  को  दर्शाता  है . अगर  तुम  अपना  कप  मेरे  ज्ञान  से  भरना  चाहते  हो  तो  पहले  तुम्हे  अपने  कप  का  ज्ञान  कहली  करना   होगा .”
यदि  आप  अपनी  ज़िन्दगी  का  असली  मकसद  जानना  चाहते  हैं   तो  पहले  आपको  सिखाये  गए  सभी  व्यर्थ  के  मकसदों (including कि  आपकी  ज़िन्दगी  का  कोई  मकसद  ही  नहीं  है ) को  अपने  दिमाग  से  निकलना  होगा .
तो  आप  अपने  जीवन  का  उद्देश्य  कैसे  पता  करेंगे ? वैसे   तो  यह  पता  करने  के   कई  तरीके  हैं , पर  यहाँ  मैं  आपको  एक  बहुत  ही  simple तरीका  बताऊंगा  जो  कोई  भी  अपना  सकता  है . आप  इस  तरीके  को  जितना  ज्यादा  accept करंगे , जितना  ज्यादा  इसके  काम  करने  की  अपेक्षा   करेंगे  यह  उतनी  ही  तेजी  से  आपके  लिए  काम  करेगा .पर   यदि  आप  इससे  ज्यादा  उम्मीद  ना  भी  करें , या   इसपे कुछ  doubt करें , यह  सोचें  कि  ये  तो  बेवकूफी  है , समय  की  बर्वादी  है  तो  भी  यह  अप्पके  लिए  काम  करेगा , बस  ज़रुरत  है  कि  आप  इसके   साथ  लगे  रहिये .—पर  हाँ  , समय  कुछ  अधिक  लगेगा .
आपको  ये  करना  है :
1)      एक  blank page ले  लीजिये  या  फिर  एक  word file खोल  लीजिये .
2)      Top पर  लिखिए , “ मेरी  जीवन   का  असली  उद्देश्य   क्या  है ?”
3)      कोई  उत्तर  लिखिए  (कुछ  भी ) जो  आपके  दिमाग  में  आ  रहा  हो . पूरा  sentence लिखने  की  ज़रुरत  नहीं  है . एक  छोटा  सा   phrase काफी  है .
4)      Step 3 को  तब  तक  repeat कीजिये  जब  तक  की  आप  कोई  ऐसा  उत्तर   ना  लिख  लें  जिससे  आपको  रोना  आ   जाये . यही  आपके  जीवन  का  उद्देश्य  है .
बस  इतना  ही . इससे  कोई   मतलब  नहीं  है  की  आप  counselor हैं  engineer हैं  या  कोई  bodybuilder हैं .कुछ  लोगों  को  ये  exercise बिलकुल  उपयुक्त  लगेगी , कुछ  लोगो  को  कोरी  बकवास . Life का  purpose क्या  है  इसको  लेकर  हमारे  मन  में  जो  भी  हलचल  है  और  अपनी  Social conditioning की  वजह  से  हम   जो  कुछ  भी  इस  विषय  में  सोचते  हैं  उसे  clear करने   में  आम  तौर  पे  15-20 मिनट  लगेंगे.गलत  उत्तर   आपकी  memory और  mind से  आयेंगे . लेकिन  जब  आपको  सही  उत्तर  मिल   जायेगा  , आपको  अहसास  होगा  कि  यह  उत्तर  किसी  बिलकुल  ही  अलग  जगह  से  आ  रहा  है .
वो  लोग  जो  अपनी  जड़े  जागरूकता  के  बिलकुल  निचले   स्तर  पर  जमा  चुके  हैं , उन्हें  सभी  गलत  उत्तर  निकालने   में  काफी  वक़्त  लगेगा , शायद  एक  घंटे  से भी  ज्यादा . लेकिन  यदि  आप , 100, 200 या  500 उत्तर  के  बाद  भी  लगे  रहेंगे  तो  आपको  वो  उत्तर  मिल   जायेगा  जो  आपकी  भावनाओं  को  बढ़ा  देगा , जो  आपको  रुला  देगा .यदि  आपने  पहले  कभी  ये  नहीं  किया  है  तो  शायद  ये  आपको  बहुत  मूर्खतापूर्ण  लगे . लगने   दीजिये  पर  इसे  करिए  ज़रूर .
आप  जैसे -जैसे  इस  प्रोसेस  से  गुजरेंगे  , आपके  कुछ  उत्तर  बहुत  एक  जैसे  लगेंगे , आप  चाहें  तो  पुराने  उत्तर  दुबारा  भी  लिख  सकते  हैं . आप  अचानक  एक  नयी  दिशा  में  सोच  सकते  हैं  और  10-20 नए  उत्तर भी लिख  सकते  हैं . That’s OK. आपके  दिमाग  में  जो  उत्तर  आये  आप  वो  लिख  सकते  हैं  बशर्ते  आप  लिखना  चालू  रखिये .
इस  दौरान  एक  समय  ऐसा  भी  आएगा  ( लगभग  50-100 answers के  बाद )  जब  आप  quit करना  चाहें , और  आप  खुद  को  उस  उत्तर  तक  पहुचते  ना  देख  प्  रहे  हों . आप  को  ऐसा  लग  सकता  है  कि  आप  किसी  बहाने  से  उठ  कर  कुछ  और  करने  लगें . ये  normal है . इस  अवरोध  को  पार  कीजिये , और  बस  लिखते  रहिये . अवरोध  का  अहसास  कुछ  देर  में  ख़तम  हो  जायेगा .
शायद  आपको  बीच  में  कुछ  ऐसे  उत्तर  मिलें  जो   आपको  थोडा  emotional कर  दें , पर  वो   आपको  रुला  ना  पाएं — ऐसे  answers को  highlight करते  हुए  आगे  बढिए , ताकि  बाद  में  आप  इनपर  वापस  आकर  नए  संयोग  बना  सकें . हर  एक  उत्तर  आपके  purpose के  एक  हिस्से  को  दर्शाता  है , पर  खुद  में  वो  पूर्ण  नहीं  है . जब  आपको  ऐसे  उत्तर  मिलना  शुरू  हो  जायें  तो  इसका  मतलब  है  कि  आप  warm-up हो  रहे  हैं  . बस  आगे  बढ़ते  रहिये .
यह  ज़रूरी  है  कि  आप  इसे  अकेले  बिना  किसी  रूकावट  के  करिएँ .यदि  आप  नास्तिक  हैं  तो  आप  इस  उत्तर  से  शुरआत  कर  सकते  है  कि , “ मेरे  जीवन  का  कोई  उद्देश्य  नहीं  है ,” या  “ जीवन  निरर्थक  है ,’ और  वहां  से  आगे  बढिए , यदि  आप  लगे  रहेंगे  तो  आपको  उत्तर  ज़रूर  मिलेगा .
जब  मैंने  यह  exercise की  तो  मुझे  लगभग  25 मिनट  लगे , और  मैं  अपने  final answer तक  106 वें  step में  पहुंचा . उत्तर  के  कुछ  parts ( जब  मैं  थोडा  emotional हो  गया ) मुझे  step no. 17,39 और  53 में  मिले .और  सबसे  ज्यादा  step 100-106 में  मुझे  अपना  answer मिला  और  refine होता  गया .. मुझे  step 55-60 के  आस – पास  बहुत  अवरोध  मह्शूश  हुआ , लगा  कि  मैं  ये  छोड़  के  कुछ  और  करूँ , लगा  कि  ये  process fail हो  जायेगा , मैंने  काफी  impatient और  irritating feel किया . Step no. 80 के  बाद  मैंने  2 मिनट का  break ले  लिया , आँखे  बंद  कर  के  थोडा  relax किया  ,अपने  mind को  clear किया  और  इस  बात  पर  focus किया   कि  मेरी  intention जवाब  पाने  की  है . –ये  मददगार  साबित  हुआ  क्योंकि  break के  बाद  मुझे  और  भी  clear answers मिलने  लगे .
Here was my final answer: to live consciously and courageously, to resonate with love and compassion, to awaken the great spirits within others, and to leave this world in peace.
मेरा  final   answer   था : जागरूकता  और  साहस  के  साथ  जीवन  जीना ,प्रेम  और  दया  को अपनाना , दूसरों  के  अन्दर  की  महान  आत्माओं  को  जगाना , और   इस  दुनिया  को  शांतिमय बनाकर छोड़ना.
जब  आपको  अपना  उत्तर  मिल  जायेगा  कि  आप  यहाँ  क्यों  हैं , तब  आप  feel करेंगे  की  वो  आपके  अंत -मन  को  छू  रहा  है . वो  शब्द  आपको  energetic लगेंगे  , और  आप  जब  भी  उन्हें  पढेंगे  तो  आप  उस  energy को  feel करेंगे .
उद्देश्य  को  जान  लेना  आसान  है  . कठिन  तो  यह  है  कि  उसे  हर  रोज़  अपने  साथ  रखना  और  खुद  पर  काम  करना  कि  एक  दिन  आप  खुद  वो  उद्देश्य  बन  जायें .
अगर  आप  यह  पूछना  चाहते  हैं  कि  यह  process काम  क्यों  करता  है  तो  आप  पहले  इस  question को  तब  तक   side में  रख  दीजिये जब  तक  आप  इस excercise  को सफलतापूर्वक  complete   नहीं  कर  लेते . और  जब  आप  ये  करलेंगे  तो  शायद   आपके  पास  अपना  खुद  का  एक  जवाब  होगा  कि  ये  काम   क्यों  करता  है . यदि  आप  10 ऐसे  लोगों  से ( जिन्होंने  इस  process को  successfully complete कर  लिया  है ) येही  प्रश्न  करें  तो  ज्यादा  chance है  कि  आपको  दस  अलग -अलग  उत्तर  मिलेंगे , जो  उनके  अपने  belief system के  हिसाब  से  होगा , और  हर  एक  में  सच्चाई  कि  अपनी   ही  छवि  होगी .
जाहिर  है  कि  अगर  आप  final answer आने  से  पहले  ही  quit कर  गए  तो  ये  process आपके  लिए  काम  नहीं  करेगा . मेरा  अनुमान  है  कि  80-90% लोगों  को  उत्तर  1 घंटे  के  अन्दर  मिल  जायेगा . अगर  आप  अपनी  धारणाओं  में  बहुत  ही  ज्यादा  उलझे  हुए  हैं  तो   शायद  आपको  5 sessions लगें  और  कुल  3 घंटे  का  वक़्त  लगे , पर  मुझे  संदेह  है  कि  ऐसे  व्यक्ति   पहले  ही  quit कर  जायेंगे  ( शायद  पहले  15 मिनट  में ) या  फिर  वो  इस  attempt ही  ना  करें . लेकिन  आप  इस  blog को  पढने  के  प्रति  आकर्षित  हुए  हैं  ( और  अभी  तक  इस  अपने  life से  बन  करने  के  बारे  में  नहीं   सोचा   है ), तो  शायद  ही  आप  इस  group को  belong करें .
इसे  try करिए . ज्यादा  से  ज्यादा  दो  चीजें  हो  सकती  हैं : आपको  अपने  जीवन  का  उद्देश्य  पता  चल  जाये   या  फिर  आप  इस  blog को  unsubscribe कर  लें .
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Note : Despite taking utmost care there could be some mistake in Hindi translation of  “How to Discover Your Life Purpose in About 20 Minutes”
निवेदन : यदि  यह  लेख  आपके लिए लाभप्रद रहा हो तो कृपया  कृपया  comment के  माध्यम  से  मुझे ज़रूर बताएं.

कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत


 कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत?
Early to bed and early to rise makes a man healthy wealthy and wise
Hi friends,
               हममें से ज्यादातर लोगों ने कभी ना कभी ये कोशिश ज़रूर की होगी कि रोज़ सुबह जल्दी उठा जाये. हो सकता है कि आपमें से कुछ लोग कामयाब भी हुए हों, पर अगर majority की बात की जाये तो वो ऐसी आदत डालने में सफल नहीं हो पाते. लेकिन आज जो article  मैं आपसे share कर रहा हूँ इस पढने के बाद आपकी सफलता की  probability निश्चित रूप से बढ़ जाएगी. यह article इस विषय पर दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों में से एक का Hindi Translation है. इसे Mr.Steve Pavlina ने लिखा है . इसका  title है “How to become an early riser.“. ये बताना चाहूँगा कि  इन्ही के द्वारा लिखे गए  लेख “20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य ” का Hindi version इस ब्लॉग पर सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले लेखों में से एक है.
तो आइये जानें कि हम कैसे डाल सकते हैं सुबह जल्दी उठने की आदत.

 कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत?

It is well to be up before daybreak, for such habits contribute to health, wealth, and wisdom.
सूर्योदय  होने  से  पहले  उठाना  अच्छा  होता  है , ऐसी  आदत  आपको  स्वस्थ , समृद्ध  और  बुद्धिमान  बनती  है .
-अरस्तु

सुबह  उठने  वाले  लोग  पैदाईशी  ऐसे  होते  हैं  या   ऐसा  बना  जा  सकता  है ? मेरे  case में  तो  निश्चित  रूप  से  मैं  ऐसा  बना  हूँ . जब  मैं  बीस  एक  साल  का  था  तब  शायद  ही  कभी  midnight से  पहले  बिस्तर  पे  जाता  था . और  मैं  लगभग  हमेशा  ही  देर  से  सोता  था. और  अक्सर  मेरी  गतिविधियाँ  दोपहर  से  शुरू  होती  थीं .
पर  कुछ  समय  बाद  मैं  सुबह  उठने  और  successful  होने  के  बीच  के  गहरे  सम्बन्ध  को  ignore नहीं  कर  पाया , अपनी  life में  भी . उन  गिने  – चुने  अवसरों  पर  जब  भी   मैं  जल्दी  उठा  हूँ  तो  मैंने  पाया  है  कि  मेरी  productivity लगभग  हमेशा  ही  ज्यादा  रही  है , सिर्फ  सुबह  के  वक़्त  ही  नहीं  बल्कि  पूरे  दिन . और  मुझे  खुद अच्छा  होने  का  एहसास  भी  हुआ  है . तो  एक  proactive goal-achiever होने  के  नाते  मैंने सुबह  उठने  की  आदत  डालने  का  फैसला  किया . मैंने  अपनी  alarm clock 5 am पर  सेट  कर  दी …
— और  अगली  सुबह  मैं  दोपहर  से  just पहले  उठा .
ह्म्म्म…………
मैंने  फिर  कई  बार  कोशिश  की , पर  कुछ  फायदा  नहीं  हुआ .मुझे  लगा  कि  शायद  मैं  सुबह  उठने  वाली  gene के  बिना  ही  पैदा  हुआ  हूँ . जब  भी  मेरा  alarm बजता  तो  मेरे  मन  में  पहला  ख्याल  यह  आता  कि  मैं  उस  शोर  को  बंद  करूँ  और  सोने  चला  जून . कई  सालों  तक  मैं  ऐसा  ही  करता  रहा , पर  एक  दिन  मेरे  हाथ  एक  sleep research लगी  जिससे  मैंने  जाना  कि  मैं  इस  problem को  गलत  तरीके  से  solve कर  रहा  था . और  जब  मैंने  ये  ideas apply   कीं  तो  मैं  निरंतर  सुबह   उठने  में  कामयाब  होने  लगा .
गलत  strategy के  साथ  सुबह  उठने  की  आदत  डालना  मुश्किल  है  पर  सही  strategy के  साथ  ऐसा  करना  अपेक्षाकृत  आसान  है .
सबसे  common गलत  strategy है  कि  आप  यह  सोचते  हैं  कि  यदि  सुबह  जल्दी  उठाना  है  तो  बिस्तर  पर  जल्दी  जाना  सही  रहेगा . तो  आप  देखते  हैं  कि  आप  कितने  घंटे  की  नीद  लेते  हैं , और  फिर  सभी  चीजों  को  कुछ  गहनते  पहले  खिसका  देते  हैं . यदि  आप  अभी  midnight से  सुबह  8 बजे  तक  सोते  हैं  तो  अब  आप  decide करते  हैं  कि  10pm पर  सोने  जायेंगे  और  6am पर  उठेंगे .  सुनने  में  तर्कसंगत  लगता  है  पर  ज्यदातर  ये  तरीका  काम  नहीं  करता .
ऐसा  लगता  है  कि  sleep patterns को  ले  के  दो  विचारधाराएं हैं . एक  है  कि  आप  हर  रोज़  एक  ही  वक़्त  पर  सोइए  और  उठिए . ये  ऐसा  है  जैसे  कि  दोनों  तरफ  alarm clock लगी  हो —आप  हर  रात  उतने  ही  घंटे  सोने  का  प्रयास  करते  हैं . आधुनिक  समाज  में  जीने  के  लिए  यह  व्यवहारिक  लगता  है . हमें  अपनी  योजना  का  सही  अनुमान  होना  चाहिए . और  हमें  पर्याप्त  आराम  भी  चाहिए .
दूसरी  विचारधारा  कहती  है  कि  आप  अपने  शरीर  की  ज़रुरत  को  सुनिए  और  जब  आप  थक  जायें  तो  सोने  चले  जाइये  और  तब  उठिए  जब  naturally आपकी  नीद  टूटे . इस  approach की  जड़  biology में  है . हमारे  शरीर  को  पता  होना  चाहिए  कि  हमें  कितना  rest चाहिए , इसलिए  हमें  उसे  सुनना  चाहिए .
Trial and error से  मुझे  पता  चला  कि  दोनों  ही  तरीके  पूरी  तरह  से  उचित  sleep patterns नहीं  देते . अगर  आप  productivity की  चिंता  करते  हैं  तो  दोनों  ही  तरीके  गलत  हैं . ये  हैं  उसके  कारण :
यदि  आप  निश्चित  समय  पे  सोते  हैं  तो  कभी -कभी  आप  तब  सोने  चले  जायेंगे  जब  आपको  बहुत  नीद  ना  आ  रही  हो . यदि  आपको  सोने  में  5 मिनट  से  ज्यादा  लग रहे  हों  तो  इसका  मतलब  है  कि  आपको  अभी  ठीक  से  नीद  नहीं  आ  रही  है . आप  बिस्तर  पर  लेटे -लेटे अपना  समय  बर्वाद  कर  रहे  हैं ; सो  नहीं  रहे  हैं . एक  और  problem ये  है  कि  आप  सोचते  हैं  कि  आपको  हर  रोज़  उठने  ही  घंटे  की  नीद  चाहिए , जो  कि  गलत  है . आपको  हर  दिन  एक  बराबर  नीद  की  ज़रुरत  नहीं  होती .
यदि  आप  उतना  सोते  हैं  जितना  की  आपकी  body आपसे  कहती  है  तो  शायद  आपको  जितना  सोना  चाहिए  उससे  ज्यादा  सोएंगे —कई  cases में  कहीं  ज्यादा , हर  हफ्ते  10-15 घंटे  ज्यदा ( एक  पूरे  waking-day के  बराबर ) ज्यादातर  लोग  जो  ऐसे  सोते  हैं  वो  हर  दिन  8+ hrs सोते  हैं , जो  आमतौर  पर  बहुत  ज्यादा  है . और  यदि  आप  रोज़  अलग -अलग  समय  पर  उठ  रहे  हैं  तो  आप  सुबह  की  planning सही  से  नहीं  कर  पाएंगे . और  चूँकि  कभी -कभार  हमारी  natural rhythm घडी से  मैच  नहीं  करती  तो  आप  पायंगे  कि  आपका  सोने  का  समय  आगे  बढ़ता  जा   रहा  है .
मेरे  लिए  दोनों  approaches को  combine करना  कारगर  साबित  हुआ . ये  बहुत  आसान  है , और  बहुत  से  लोग  जो  सुबह  जल्दी  उठते  हैं , वो  बिना  जाने  ही  ऐसा  करते  हैं , पर  मेरे  लिए  तो  यह  एक  mental-breakthrough था .Solution ये  था  की  बिस्तर  पर  तब  जाओ  जब  नीद  आ  रही  हो  ( तभी  जब  नीद  आ  रही  हो ) और  एक  निश्चित  समय  पर  उठो ( हफ्ते  के  सातों  दिन ). इसलिए  मैं  हर  रोज़  एक  ही  समय  पर  उठता  हूँ ( in my case 5 am) पर  मैं  हर  रोज़  अलग -अलग  समय  पर  सोने  जाता  हूँ .
मैं  बिस्तर  पर  तब  जाता  हूँ  जब  मुझे  बहुत  तेज  नीद  आ  रही  हो . मेरा  sleepiness test ये  है  कि  यदि  मैं  कोई  किताब  बिना  ऊँघे  एक -दो  पन्ने  नहीं  पढ़  पाता  हूँ  तो  इसका  मतलब  है  कि  मै  बिस्तर  पर  जाने  के  लिए  तैयार  हूँ .ज्यादातर  मैं  बिस्तर  पे  जाने  के  3 मिनट  के  अन्दर  सो  जाता  हूँ . मैं  आराम  से  लेटता  हूँ  और  मुझे  तुरंत  ही  नीद  आ  जाति  है .  कभी  कभार  मैं  9:30 पे  सोने  चला  जाता  हूँ  और  कई  बार  midnight   तक  जगा  रहता  हूँ . अधिकतर  मैं  10 – 11 pm के  बीच  सोने चला  जाता  हूँ .अगर  मुझे   नीद  नहीं   आ  रही  होती  तो  मैं  तब  तक  जगा  रहता  हूँ  जब  तक  मेरी  आँखें  बंद  ना  होने  लगे . इस  वक़्त  पढना  एक  बहुत  ही  अच्छी activity है , क्योंकि  यह  जानना  आसान  होता  है  कि  अभी  और  पढना  चाहिए  या  अब  सो  जाना  चाहिए .
जब  हर  दिन  मेरा  alarm बजता  है  तो  पहले  मैं  उसे  बंद  करता  हूँ , कुछ  सेकंड्स  तक  stretch करता  हूँ , और  उठ  कर  बैठ  जाता  हूँ . मैं  इसके  बारे  में  सोचता  नहीं . मैंने  ये  सीखा  है  कि  मैं  उठने  में  जितनी  देर  लगाऊंगा ,उतना  अधिक  chance है  कि  मैं  फिर  से  सोने  की  कोशिश  करूँगा .इसलिए  एक  बार  alarm बंद  हो  जाने के  बाद  मैं  अपने  दिमाग  में  ये  वार्तालाप  नहीं  होने  देता  कि  और  देर  तक  सोने  के  क्या  फायदे  हैं . यदि  मैं  सोना  भी  चाहता  हूँ , तो  भी  मैं  तुरंत  उठ  जाता  हूँ .
इस  approach को  कुछ  दिन  तक  use करने  के  बाद  मैंने  पाया  कि  मेरे  sleep patterns एक  natural rhythm में  सेट  हो  गए  हैं . अगर  किसी  रात  मुझे  बहुत  कम  नीद  मिलती  तो  अगली  रात  अपने  आप  ही  मुझे  जल्दी  नीद  आ  जाती  और  मैं  ज्यदा  सोता . और  जब  मुझमे  खूब  energy होती  और  मैं  थका  नहीं  होता  तो  कम  सोता . मेरी  बॉडी  ने  ये  समझ  लिया  कि  कब  मुझे  सोने  के  लिए  भेजना  है  क्योंकि  उसे  पता  है  कि  मैं  हमेशा  उसी  वक़्त  पे  उठूँगा  और  उसमे  कोई  समझौता नहीं  किया  जा  सकता .
इसका  एक  असर ये हुआ कि  मैं  अब  हर  रात  लगभग  90 मिनट  कम  सोता  ,पर  मुझे  feel होता  कि  मैंने  पहले  से ज्यादा  रेस्ट  लिया  है . मैं  अब  जितनी  देर  तक  बिस्तर  पर  होता  करीब  उतने  देर  तक  सो  रहा  होता .
मैंने  पढ़ा  है  कि  ज्यादातर  अनिद्रा  रोगी  वो  लोग  होते  हैं  जो  नीद  आने  से  पहले  ही  बिस्तर  पर  चले  जाते  हैं . यदि  आपको  नीद  ना  आ  रही  हो  और  ऐसा  लगता  हो  कि  आपको  जल्द ही  नीद  नहीं  आ  जाएगी  , तो  उठ  जाइये  और  कुछ  देर  तक  जगे  रहिये . नीद  को  तब  तक  रोकिये  जब  तक  आपकी  body ऐसे  hormones ना  छोड़ने  लगे  जिससे आपको नीद ना आ जाये.अगर  आप  तभी  bed पे  जाएँ  जब  आपको  नीद  आ  रही  हो  और  एक  निश्चित  समय  उठें  तो  आप  insomnia का  इलाज  कर  पाएंगे .पहली  रात  आप  देर  तक  जागेंगे  , पर  बिस्तर  पर  जाते  ही  आपको  नीद  आ  जाएगी . .पहले  दिन  आप  थके  हुए  हो  सकते  हैं  क्योंकि  आप  देर  से  सोये  और  बहुत  जल्दी  उठ  गए , पर  आप  पूरे  दिन  काम  करते  रहेंगे  और  दूसरी  रात  जल्दी  सोने  चले  जायेंगे .कुछ  दिनों  बाद  आप  एक  ऐसे  pattern में  settle हो  जायेंगे  जिसमे  आप  लगभग  एक  ही  समय  बिस्तर  पर  जायंगे  और  तुरंत  सो  जायंगे .
इसलिए   यदि  आप  जल्दी  उठाना  चाहते  हों  तो  ( या  अपने  sleep pattern को  control करना  चाहते  हों ), तो  इस  try करिए :  सोने  तभी  जाइये  जब  आपको  सच -मुच  बहुत  नीद  आ रही  हो  और  हर  दिन  एक  निश्चित  समय  पर  उठिए .
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Note : Despite taking utmost care there could be some mistake in Hindi translation of  “How to become an early riser”
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जीरो से हीरो- कैसे बने है ये

70 का दशक भारतीय उद्योग को नई दिशा देने वाला माना जा सकता है. यह वह दशक था जब कई उद्यमियों ने आम सोच से हटकर, अपनी आर्थिक, सामाजिक स्थितियों की परवाह न करते हुए अपना छोटा सा कारोबार शुरू किया और आज वे भारत ही नहीं एशिया के करोड़पति-अरबपतियों की सूची में शामिल हैं. नए उद्योगपतियों के लिए इनकी कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं.

किरण मजूमदार शॉ: फोर्ब्स की दुनिया की 50 अरबपति महिलाओं की सूची में शामिल किरण मजूमदार शॉ और इनकी कंपनी बायोकॉन आज किसी परिचय और नाम की मुहताज नहीं है. किरण मजूमदार शॉ कभी अपना कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक परेशानियों से घिरी थीं. कोई भी बैंक इन्हें लोन देने को तैयार नहीं था. नारायण मूर्ति की ही तरह इन्होंने भी 10000 की शुरुआती पूंजी से अपने किराए के मकान से ही बायोकॉन की शुरुआत की थी. बेंगलोर में जन्मी, पली-बढ़ी किरण मजूमदार ने डॉक्टर बनना चाहती थीं. पर डॉक्टरी का सपना छोड़कर इन्होंने बेंगलोर से ही जूलॉजी ऑनर्स किया. साधारण जूलॉजी ऑनर्स की पढ़ाई को ही अपना पेशा बनाते हुए किरण ने 1978 में बायोकॉन की शुरुआत की. पर इसे शुरू करना इतना आसान नहीं था. आज किरण मजूदमदार शॉ के नाम पर लाखों के इंवेस्टमेंट के लिए कई कंपनियां, बैंक तैयार हो जाएंगे, पर तब इस युवा लड़की को इसके नए बिजनेस की शुरुआत के लिए बैंक ने लोन देने से मना कर दिया था. इसके अलावे भी कई मुश्किल हालात थे. भारत जैसे देश में जहां मूलभूत बिजली और शुद्ध पानी की आपूर्ति करना भी एक समस्या है, किरण ने एक फॉर्मास्यूटिकल कंपनी शुरू करने का साहस किया था. उस पर भी आर्थिक तंगी के हालात में कंपनी शुरू करने के लिए कोई जगह किराए पर लेना भी संभव नहीं था. कंपनी के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की भर्ती करना एक चुनौती है. एक तो नई कंपनी, उस पर काम के लिए जरूरी वेतन देना, हर चीज चुनौतीपूर्ण था. पर इन सारी चुनौतियों को पार करते हुए किरण ने बायोकॉन शुरू किया. इतना ही नहीं एक साल के अंदर यह भारत से अमेरिका और यूरोप को एंजाइम निर्यात करने करने वाली पहली कंपनी बन गई. आज बायोकॉन भारत की प्रतिष्ठित कंपनियों में है और इसकी संपत्ति अरबों की है.

धीरूभाई अंबानी: धीरजलाल हीरालाल अंबानी बाद में धीरूभाई अंबानी (Dhirubhai Ambani) के नाम से जाने गए. आज शायद देश का बच्चा-बच्चा धीरूभाई अंबानी और रिलायंस इंडस्ट्रीज का नाम जानता हो. पर एक सामान्य गुजराती शिक्षक परिवार से ताल्लुक रखनेवाले धीरूभाई अंबानी से भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी का मालिक करोड़पति धीरूभाई अंबानी बनना इतना आसान नहीं था. कहते हैं कारोबार का कीड़ा धीरूभाई के दिमाग में पहले ही था. पर पैसों की तंगी के कारण ऐसा संभव नहीं था. धीरूभाई अंबानी केवल 500 रु. लेकर विदेश गए और 15000 की जमा-पूंजी के साथ 1962 में भारत लौटकर रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना की. 1977 में पब्लिक जानकारी में आई आरआईएल की 2007 तक 60 बिलियन डॉलर संपत्ति ने अंबानी परिवार को दुनिया के दूसरे सबसे अमीर परिवारों की श्रेणी में ला दिया. आज आरआईएल पेट्रोकेमिकल्स (petrochemicals), रिफाइनिंग (refining), ऑयल एंड गैस (oil and gas) आदि कई क्षेत्रों में अपने व्यापार कर रहा है.

सुनील मित्तल (Sunil Mittal): भारती एयरटेल के मालिक सुनील भारती पहले भारतीय माने जाते हैं जिन्होंने टेलीकम्यूनिकेशन में उज्ज्वल भविष्य देखते हुए टेलीकम्यूनिकेशन को बिजनेस का आधार बनाया और भारती एंटरप्राइज की स्थापना की. 18 साल की उम्र में अपने पिता से 20 हजार रुपए उधार लेकर उन्होंने अपना पहला बिजनेस शुरू किया था. 1980 में अपने भाई के साथ मिलकर भारती ओवरसीज ट्रेडिंग लिमिटेड की स्थापना की. वे जापान से सुजुकी मोटर्स की पोर्टेबल इलेक्ट्रिक जेनेरेटर्स के आयात के बिजनेस में थे, पर अचानक ही भारत सरकार ने इस पर बैन लगा दिया. उस समय सुनील मित्तल के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई, कि अब क्या? फिर 1984 में उन्होंने पुश-बटन फोन का बिजनेस शुरू किया. 1992 में बीटल के नाम से आंसरिंग मशीन फोन बनाना शुरू किया. बीटल सक्सेसफुल रहा. 1992 में उन्होंने मोबाइल फोन नेटवर्क नीलामी (mobile phone network licences auctioned ) में बिड किया. इसकी प्रमुख शर्त थी कि बिडर को मोबाइल ऑपरेटिंग में एक्सपीरिएंस होना चाहिए. अत: फ्रेंच टेलीकॉम ग्रुप विवेंदी का लाइसेंस मित्तल को मिल गया. 1994 में उनके मोबाइल टेलीकॉम बिजनेस को भारत सरकार द्वारा मान्यता मिल गई. 1995 में भारती सेल्यूलर लिमिटेड (बीसीएल) के अंतर्गत एयरटेल (AirTel) के नाम सेल्यूलर सर्विस दिल्ली में शुरू हुई. आज भारती एयरटेल की संपत्ति, सेवा और नाम से हर कोई परिचित है.

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10 Oct 2015

सफलता की कोई उम्र नहीं होती !

इस संसार में बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपने कार्योँ से अपनी उम्र को पीछे छोड़ दिया। यह बात सच है कि हमारे शरीर के कार्य करने की एक सीमा है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर के कार्य करने की क्षमता घटती जाती है, लेकिन जिन लोगों के हौसले बुलंद होते हैं, जो जीवन में कुछ कर गुजरने की चाह रखते हैं, जिनमें उत्साह – उमँग होता है, जिनकी इच्छाशक्ति व संकल्पशक्ति मजबूत होती है, ऐसे व्यक्तियों के सामने कोई बाधा बड़ी नहीं होती। ऐसे व्यक्ति आत्मविश्वास से भरे हुयें होते है, जो असंभव को भी संभव बना देते है।
"हम इसलिए खेलना नहीं छोड़ देते
क्योंकि हम बूढ़े हो जाते हैं,
हम इसलिए बूढ़े हो जाते हैं
क्योंकि हम खेलना छोड़ देते हैं!"
युवा किसी आयु अवस्था का नाम नहीं, बल्क़ि शक्ति का नाम है। जिसने अपने मन और आत्मा की शक्ति को जगा लिया, वह ७० वर्ष की आयु में भी युवा है।
बहुत से लोग उम्र बढ़ने के साथ – साथ सोचने लगते हैं कि अब तो हमारी उम्र हो गयी है, “अब हमसे ये सब नहीं हो सकता”। उनकी यही सोच उन्हें निर्बल बना देती है और कुछ कार्य नहीं करने देती। व्यक्ति जितना अपने शरीर से कार्य करता है, उससे कई गुना कार्य वह अपने मन से करता है। यदि मन की शक्तियाँ ही उसकी कमजोर पड़ गई हैं, तो फिर जरूरत है उन्हें जगाने की।
शक्तियों के जागरण से संबंधित एक ऐतिहासिक कथा याद आती है।
एक राजा के पास कई हाथी थे, लेकिन एक हाथी बहुत शक्तिशाली था, बहुत आज्ञाकारी, समझदार व युद्ध-कौशल में निपुण था। बहुत से युद्धों में वह भेजा गया था और वह राजा को विजय दिलाकर वापस लौटा था, इसलिए वह महाराज का सबसे प्रिय हाथी था। समय गुजरता गया और एक समय ऐसा भी आया, जब वह वृद्ध दिखने लगा। अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर पाता था। इसलिए अब राजा उसे युद्ध क्षेत्र में भी नहीं भेजते थे। एक दिन वह सरोवर में जल पीने के लिए गया, लेकिन वहीं कीचड़ में उसका पैर धँस गया और फिर धँसता ही चला गया। उस हाथी ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह उस कीचड़ से स्वयं को नहीं निकाल पाया। उसकी चिंघाड़ने की आवाज से लोगों को यह पता चल गया कि वह हाथी संकट में है। हाथी के फँसने का समाचार राजा तक भी पहुँचा।
राजा समेत सभी लोग हाथी के आसपास इक्कठा हो गए और विभिन्न प्रकार के शारीरिक प्रयत्न उसे निकालने के लिए करने लगे। जब बहुत देर तक प्रयास करने के उपरांत कोई मार्ग नहीं निकला तो राजा ने अपने सबसे अनुभवी मंत्री को बुलवाया। मंत्री ने आकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और फिर राजा को सुझाव दिया कि सरोवर के चारों और युद्ध के नगाड़े बजाए जाएँ। सुनने वालोँ को विचित्र लगा कि भला नगाड़े बजाने से वह फँसा हुआ हाथी बाहर कैसे निकलेगा, जो अनेक व्यक्तियों के शारीरिक प्रयत्न से बाहर निकल नहीं पाया।
आश्चर्यजनक रूप से जैसे ही युद्ध के नगाड़े बजने प्रारंभ हुए, वैसे ही उस मृतप्राय हाथी के हाव-भाव में परिवर्तन आने लगा। पहले तो वह धीरे-धीरे करके खड़ा हुआ और फिर सबको हतप्रभ करते हुए स्वयं ही कीचड़ से बाहर निकल आया। अब मंत्री ने सबको स्पष्ट किया कि हाथी की शारीरिक क्षमता में कमी नहीं थी, आवश्यकता मात्र उसके अंदर उत्साह के संचार करने की थी। हाथी की इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि यदि हमारे मन में एक बार उत्साह – उमंग जाग जाए तो फिर हमें कार्य करने की ऊर्जा स्वतः ही मिलने लगती है और कार्य के प्रति उत्साह का मनुष्य की उम्र से कोई संबंध नहीं रह जाता।
जीवन में उत्साह बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि मनुष्य सकारात्मक चिंतन बनाए रखे और निराशा को हावी न होने दे। कभी – कभी निरंतर मिलने वाली असफलताओं से व्यक्ति यह मान लेता है कि अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर सकता, लेकिन यह पूर्ण सच नहीं है।
  • हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी आजादी की लड़ाई 48 साल की उम्र में शुरू की थी और हमें आज़ादी दिलाई।
  • जापान के 105 वर्षीय धावक हिडकीची मियाज़ाकि ने 42.22 सेकण्ड्स में 100 मीटर डैश कम्पलीट कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।
  • मशहूर अभिनेता बोमन ईरानी ने 44 साल की उम्र में एक्टिंग करना शुरू की।
  • ग्रामीण बैंक के फाउंडर और नोबल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद युनुस ने 43 साल की उम्र में ग्रामीण बैंक की शुरुआत की।
  • अमिताभ बच्चन आज 70 साल से ऊपर होने के बावजूद सबसे सक्रीय बॉलीवुड स्टार्स में से एक हैं।
ऐसे तमाम उदहारण हैं जहाँ लोगों ने साबित किया है कि अगर कुछ कर गुजरने का हौंसला हो तो क्या उम्र और क्या चुनौतियाँ कुछ मायने नहीं रखता ।
मित्रों, प्रसिद्ध विचारक जॉन ओ डनह्यू का कहना है –
आप उतने युवा है, जितना आप महसूस करते हैं। अगर आप अंदर के उत्साह को महसूस करना शुरू करेंगे, तो एक ऐसी जवानी महसूस  करेंगे, जिसे कोई भी आपसे छीन नहीं सकता”।
मन में उत्साह हो तो उम्र कभी भी कार्य के मार्ग पर बाधा नहीं बनती। बाधा बनती है तो केवल हमारी नकारात्मक सोच। यदि कार्य करना है तो किसी भी उम्र में कार्य किया जा सकता है, कार्य करने के तरीके बदले जा सकते हैं और पहले की तुलना में अधिक अच्छे ढंग से व कुशलतापूर्वक कार्य किया जा सकता है।
उम्र के असर को बहुत हद्द तक अपने प्रयासों, सकारात्मक सोच और उत्साह से कम किया जा सकता है, अतः ये कहने से पहले कि हमारी उम्र हो गयी है , हम ये नहीं कर सकते , वो नहीं कर सकते उन तमाम लगों के बारे में सोचिये जिनके लिए age एक number से अधिक कुछ नहीं है। अगर वो कर सकते हैं तो कोई भी कर सकता है, तो चलिए फिर से सपने देखना शुरू करिए, फिर से उनका पीछा कीजिये और एक बार फिर अपने सपनो को साकार कर दीजिये।
धन्यवाद!
ViratVirat Chaudhary
Palanpur, Gujrat
विराट एक  Professional Blogger हैं और एक IT Education Institute भी run करते हैं.
We are grateful to Virat for sharing this inspirational article with examples of Old Age Success stories in Hindi. We wish him all the very best in all his endeavours.
नोट: दोस्तों, इस लेख में सफलता के लिए अधिक उम्र बाधक नहीं होती; इस बारे में बताया गया है, पर यही बात कम उम्र में सफलता के लिए भी लागु होती है. कम उम्र में भी बहुत से लोगों ने बड़ी-बड़ी सफलताएं हासिल की हैं, फेसबुक फाउंडर मार्क जुकरबर्ग इसका एक बड़ा उदाहरण हैं. उन्होंने मात्र 20 साल की उम्र में Facebook found की थी.
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25 May 2014

Narendra Modi – गुजरात के मुख्यमंत्री से हिन्दुस्तान के प्रधानमन्त्री


नरेंद्र मोदी का जीवन परिचय
गुजरात के वर्तमान मुख्यमंत्री और भाजपा के लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर, 1950 को गांव वादनगर, उत्तरी गुजरात के एक साधारण मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था. लेकिन उन्हें एक समृद्ध संस्कृति धरोहर के रूप में मिली थी. वादनगर के एक स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, गुजरात यूनिवर्सिटी से नरेंद्र मोदी ने राजनीति विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की. नरेंद्र मोदी का कहना है कि कारगिल युद्ध के समय उन्होंने स्वयंसेवी के तौर पर आर्मी के जवानों को सहायता मुहैया करवाई थी. युवावस्था में ही वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्यता ग्रहण कर नव निर्माण नामक आंदोलन का हिस्सा बन गए थे. इस संगठन के साथ सक्रियता से काम करने के बाद उन्हें भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में मनोनीत किया गया. वर्तमान में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के देशभक्त दक्षिणपंथी मोर्चे के सदस्य हैं.

नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व
नरेंद्र मोदी के मस्तिष्क में बचपन से ही राष्ट्रभावना विद्यमान थी. भारत-पाक युद्ध हो या कोई प्राकृतिक आपदा, हर मुश्किल के समय उन्होंने स्वयंसेवी के रूप में समाज सेवा करना अपना कर्तव्य समझा. वह एक प्रगतिशील और व्यावहारिक व्यक्तित्व वाले नेता हैं.

नरेंद्र मोदी का राजनैतिक सफर
नरेंद्र मोदी स्कूल और कॉलेज के दिनों में ही आरएसएस जैसे हिंदूवादी संगठन का हिस्सा बन गए थे. आरएसएस के साथ अपने कार्यकाल के दौरान नरेंद्र मोदी ने विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनमें तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी का शोकजनक काल सबसे प्रमुख है. इस दौरान नागरिकों के मानवाधिकारों का हनन होने पर नरेंद्र मोदी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर प्रचारक के तौर पर अपने दल की नीतियों और जरूरत को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया. भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा बनने के बाद दल के भीतर मोदी की छवि एक कुशल रणनीतिकार की बन गई थी. वर्ष 1990 में जब गठबंधन की सरकार बनने के बाद भाजपा को केंद्रीय सत्ता में आने का मौका मिला तब पार्टी की लोकप्रियता बढ़ने लगी. लेकिन कुछ समय चली इस सरकार ने भाजपा और नरेंद्र मोदी को मजबूत राजनैतिक आधार प्रदान कर दिया था. दो-तिहाई बहुमत के साथ गुजरात में भाजपा ने वर्ष 1995 के चुनाव जीत लिए. तब से लेकर अब तक गुजरात में भाजपा का ही एकाधिकार है. केशुभाई पटेल के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए नरेंद्र मोदी को पार्टी को महासचिव बनाकर दिल्ली भेजा गया. वर्ष 1995 मोदी के राजनैतिक सफर के लिए बहुत महत्वपूर्ण था. महासचिव रहते हुए पहली बार किसी युवा नेता को देश के पांच बड़े राज्यों में पार्टी का प्रभारी बनाया गया था. राष्ट्रीय स्तर पर काम करते हुए नरेंद्र मोदी को उत्तर-पूर्वी और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्यों में पार्टी के संचालन का कार्यभार प्रदान किया गया.. वर्ष 2001 में केशुभाई पटेल को हटाए जाने के बाद नरेंद्र मोदी को सर्वसम्मति से गुजरात के मुख्यमंत्री का पद सौंपा गया.



नरेंद्र मोदी का योगदान
गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए नरेंद्र मोदी ने पार्टी और अपने राज्य में बहुत लोकप्रियता हासिल कर ली. उन्हें एक प्रगतिशील नेता के रूप में पहचान भी मिली.

  • जिस समय नरेंद्र मोदी को गुजरात का प्रभार सौंपा गया, उस समय गुजरात आर्थिक और सामाजिक दोनों ही क्षेत्र में बहुत पिछड़ा हुआ था. नरेंद्र मोदी के उत्कृष्ट प्रयासों द्वारा गुजरात ने उनके पहले कार्यकाल के दौरान ही सकल घरेलू उत्पाद में 10% तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है.
  • गुजरात के एकीकृत विकास के लिए नरेंद्र मोदी ने कई योजनाओं को भी लागू किया, जिसमेंपंचामृत योजना सबसे प्रमुख है.
  • जल संसाधनों का एक ग्रिड बनाने के लिए नरेंद्र मोदी ने सुजलाम सुफलाम नामक योजना का भी संचालन किया जो जल संरक्षण के क्षेत्र में बहुत प्रभावी सिद्ध हुई है.
  • कृषि महोत्सव, बेटी बचाओ योजना, ज्योतिग्राम योजना, कर्मयोगी अभियान, चिरंजीवी योजना जैसी विभिन्न योजनाओं को भी नरेंद्र मोदी द्वारा लागू किया.
  • जनवरी 2001 में आए भयंकर भूचाल में सबसे ज्यादा नुकसान गुजरात के भुज शहर को ही हुआ. भुज एक कमजोर नींव पर बने मकानों वाला शहर है. इस भूकंप ने पूरे शहर को तितर-बितर कर दिया. नरेंद्र मोदी ने अपने प्रयासों द्वारा आपदा प्रबंधन और पुनर्वास के लिए बहुत कार्य किए. प्रभावी प्रयासों के लिए नरेंद्र मोदी को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा उत्कृष्ट योगदान के लिए योग्यता पत्र भी प्रदान किया गया.

नरेंद्र मोदी से जुड़े विवाद
नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात दंगों में शामिल होने का आरोप जुड़ा हुआ है. उन्हें हिंदू-मुसलमानों की आपसी भावनाओं को भड़काने और दंगों में कोई प्रभावी कदम ना उठाने जैसे कई आरोपों का सामना करना पड़ रहा है. दंगों के बाद सभी विपक्षी पार्टियों ने मोदी से इस्तीफा देने की मांग कर डाली. वर्ष 2009 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक विशेष जांच टीम का गठन कर उसे गुजरात दंगों की वजह और अभियुक्तों की पड़ताल करने का काम दिया गया. लेकिन SIT  की रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी के विरुद्ध सबूत ना होने का हवाला दिया गया. जिसके बाद मोदी को क्लीन चिट मिल गई. हालांकि कई अखबारों ने यह मुद्दा उठाया कि अपनी पहुंच का प्रयोग कर मोदी इस आरोप से मुक्त हुए हैं. उन्होंने दंगों को रोकने के लिए कोई कठोर कदम नहीं उठाए, इतना ही नहीं उन्होंने मुसलमानों की हत्या को भी जायज ठहराया है. बीजेपी ने इसे कांग्रेस की साजिश बता आरोप को नकार दिया.

नरेंद्र मोदी को दिए गए सम्मान
  • 2006 और 2007 में हुए एक देशव्यापी सर्वे के आधार पर इंडिया टुडे पत्रिका ने दोनों बार नरेंद्र मोदी को ही सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री चुना
  • 2009 में एफडीआई पत्रिका ने सभी एशियाई देशों में से नरेंद्र मोदी को एफडीआई पर्सनैलिटी का खिताब प्रदान किया.
  • वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के दौरान अनिल अंबानी ने नरेंद्र मोदी को भारत के अगले नेता के रूप में संबोधित किया.
  • गुजरात में आए भूकंप में राहत कार्य और आपदा प्रबंधन के सफल प्रयासों के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा नरेंद्र मोदी को योग्यता पत्र प्रदान किया गया.
लाल कृष्ण आडवाणी के शागिर्द माने जाने वाले नरेंद्र मोदी एक कुशल और व्यवहारिक मुख्यमंत्री हैं. इस मुकाम पर वह अपने कठोर परिश्रम और मेहनत के बूते पर ही पहुंचे हैं. समाज की उन्नति और विकास के लिए वह हमेशा प्रयासरत रहते हैं.



लोक सभा चुनाव २०१४ में मोदी की स्थिति

न्यूज़ एजेंसीज व पत्रिकाओं द्वारा किये गये तीन प्रमुख सर्वेक्षणों ने नरेन्द्र मोदी को प्रधान मन्त्री पद के लिये जनता की पहली पसन्द बताया है एसी वोटर पोल सर्वे के अनुसार नरेन्द्र मोदी को पीएम पद का प्रत्याशी घोषित करने से एनडीए के वोट प्रतिशत में पाँच प्रतिशत के इजाफ़े के साथ १७९ से २२० सीटें मिलने की सम्भावना व्यक्त की गयी। सितम्बर २०१३ में नीलसन होल्डिंग और इकोनॉमिक टाइम्स ने जो परिणाम प्रकाशित किये थे उनमें शामिल शीर्षस्थ १०० भारतीय कार्पोरेट्स में से ७४ कारपोरेट्स ने नरेन्द्र मोदी तथा ७ ने राहुल गान्धी को बेहतर प्रधानमन्त्री बतलाया था। चुनावों की समीक्षा करते हुए राजनीति विज्ञानी आशुतोष वार्ष्णेय की यह टिप्पणी थी कि बीजेपी को अन्य पार्टियों के साथ मिलकर और अधिक बड़े गठबन्धन की कोशिश करनी चाहिये थी जिसमें वह अभी तक कामयाब नहीं हो सकी है। नोबुल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन मोदी को बेहतर प्रधान मन्त्री नहीं मानते ऐसा उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था। उनके विचार से मुस्लिमों में उनकी स्वीकार्यता संदिग्ध हो सकती है जबकि जगदीश भगवती और अरविन्द पानगढिया को मोदी का अर्थशास्त्र बेहतर लगता है। योग गुरु स्वामी रामदेव व मुरारी बापू जैसे कथावाचक नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत का भविष्य सुरक्षित समझते हैं।
पार्टी की ओर से पीएम प्रत्याशी घोषित किये जाने के बाद नरेन्द्र मोदी ने पूरे भारत का भ्रमण किया। इस दौरान तीन लाख किलोमीटर की यात्रा कर पूरे देश में ४३७ बड़ी चुनावी रैलियाँ, ३-डी सभाएँ व चाय पर चर्चा आदि को मिलाकर कुल ५८२७ कार्यक्रम किये। चुनाव अभियान की शुरुआत उन्होंने २६ मार्च २०१४ को मां वैष्णो देवी के आशीर्वाद के साथ जम्मू से की और समापन मंगल पाण्डे की जन्मभूमि बलिया में किया। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात भारत की जनता ने एक अद्भुत चुनाव प्रचार देखा। यही नहीं, नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने दो हजार चौदह के चुनावों में अभूतपूर्व सफलता भी प्राप्त की।
चुनाव में जहाँ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ३३६ सीटें जीतकर सबसे बड़े संसदीय दल के रूप में उभरा वहीं अकेले भारतीय जनता पार्टी ने २८२ सीटों पर विजय प्राप्त की। काँग्रेस केवल ४४ सीटों पर सिमट कर रह गयी और उसके गठबंधन को केवल ५९ सीटों से ही सन्तोष करना पड़ा। फ़िलहाल वे स्वतन्त्र भारत में जन्म लेने वाले ऐसे व्यक्ति हैं जो विगत २००१ से लगातार १४ साल तक गुजरात के १४वें मुख्यमन्त्री रहे और यह भी एक अद्भुत संयोग ही है कि वे हिन्दुस्तान के १४वें प्रधानमन्त्री होंगे जो २०१४ में शपथ ग्रहण करेंगे।
नरेन्द्र भाई जी मोदी को Zindgi ki ABCD परिवार की ओर से लाखो बधाईया...

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Comment में नरेन्द्र भाई जी मोदी को बधाई जरुर दे,,,,,